
#इंदौर में लगातार हो रही अवैध और अनियंत्रित बोरिंग के मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लैई की खंडपीठ ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए नगर निगम और राज्य शासन को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है कि शहर में जल स्तर को बचाने और अवैध बोरिंग रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
कोर्ट ने नगर निगम और शासन को यह जवाब दाखिल करने के लिए महज 24 घंटे का समय दिया है। यह निर्देश शहर में गिरते भू-जल स्तर और बोरिंग के कारण होने वाले जोखिमों को देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि प्रशासन की सुस्ती के कारण शहर में मनमानी तरीके से बोरवेल खोदे जा रहे हैं, जिससे भविष्य में जल संकट और गहरा सकता है।
अब सबकी निगाहें नगर निगम और शासन द्वारा कोर्ट में दी जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या प्रशासन अवैध बोरिंग को रोकने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना पेश कर पाएगा या फिर कोर्ट इस मामले में कोई कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करेगा, यह अगले 24 घंटों में स्पष्ट हो जाएगा।
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