
डीएम की सख्ती के बाद बड़हिया अस्पताल पर बड़ा एक्शन, प्रभारी को 24 घंटे में जवाब देने का आदेश
बड़हिया (लखीसराय): CHC बड़हिया की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार के औचक निरीक्षण में सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. जे.पी. सिंह ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे के भीतर बिंदुवार जवाब देने का निर्देश दिया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी पत्र (ज्ञापांक-1089, दिनांक 18 जुलाई 2026) में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला तो प्रपत्र ‘क’ गठित कर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग को अनुशंसा भेजी जाएगी।
डीएम के निरीक्षण में सामने आईं बड़ी गड़बड़ियां
17 और 18 जुलाई को जिलाधिकारी ने बड़हिया रेफरल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अस्पताल में मौजूद नहीं मिले। वहीं मरीजों और स्थानीय लोगों ने भी अस्पताल की कार्यशैली को लेकर कई गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं।
चार गंभीर आरोपों पर मांगा गया जवाब
1. अस्पताल से लगातार अनुपस्थित रहने का आरोप
ग्रामीणों ने डीएम को बताया कि प्रभारी सप्ताह में केवल एक-दो दिन और कुछ घंटों के लिए ही अस्पताल आते हैं, जिससे ओपीडी सहित प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
2. ड्यूटी रोस्टर में अनियमितता
निरीक्षण के दौरान रोस्टर में दर्ज चिकित्सक अनुपस्थित मिले, जबकि उनकी जगह आयुष चिकित्सक सेवाएं देते पाए गए। आयुष चिकित्सकों ने बताया कि वे प्रभारी के मौखिक आदेश पर ड्यूटी कर रहे थे, जिसकी कोई आधिकारिक सूचना सिविल सर्जन कार्यालय को नहीं दी गई थी।
3. डीएम के आदेश की अनदेखी
जिलाधिकारी ने पहले ही सभी स्वास्थ्य सेवाओं को पुराने भवन से नए भवन में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद नया भवन बंद मिला और पूरा संचालन पुराने जर्जर भवन से किया जा रहा था।
4. बायोमेट्रिक उपस्थिति में गड़बड़ी का आरोप
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज कराने में अनियमितता बरती गई और बायोमेट्रिक प्रणाली में हेरफेर कर वेतन निकासी की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकों और कर्मचारियों की मोबाइल लोकेशन की भी जांच कराई जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग का कड़ा संदेश
सिविल सर्जन ने साफ कर दिया है कि लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई को सरकारी अस्पतालों में जवाबदेही और व्यवस्था सुधारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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