
मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करे केंद्र, 1500 आदिवासियों के बलिदान को मिले सम्मान
वनवासी कल्याण आश्रम के केंद्रीय कार्यकारी मंडल में प्रस्ताव पारित; पाठ्य-पुस्तकों में मानगढ़ के इतिहास को शामिल करने की मांग
भीलवाड़ा (महेन्द्र नागौरी)जलियांवाला बाग से छह साल पहले मानगढ़ की पहाड़ियों पर हुए भीषण गोलीकांड में 1500 से अधिक जनजातीय महिला, पुरुष और बच्चों के बलिदान को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मांग उठी है। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम ने केंद्र सरकार से मानगढ़ धाम को अविलंब राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने और उसके ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप संरक्षण एवं विकास की मांग की है।
भीलवाड़ा के रामेश्वरम भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने बताया कि केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया। उन्होंने कहा कि 17 नवंबर 1913 को संत गोविंद गुरु के नेतृत्व वाले भगत आंदोलन को कुचलने के लिए अंग्रेजी शासन ने मानगढ़ में गोलीकांड किया था। यह जनजातीय समाज के अद्वितीय बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण अध्याय है।
आश्रम ने राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश सरकारों से स्कूल-कॉलेजों की पाठ्य-पुस्तकों में मानगढ़ के इतिहास को उचित स्थान देने तथा सामाजिक-धार्मिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों से इस मांग के लिए एकजुट होने की अपील की।
पत्रकार वार्ता में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तेची गुबिन, संयुक्त महामंत्री विष्णुकांत, राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद के अध्यक्ष डॉ. थावरचंद डामोर, प्रचार प्रमुख प्रमोद पेठकर और मीडिया संयोजक कैलाश सोनी उपस्थित रहे।
वनवासी कार्यकर्ता सम्मेलन का उद्घाटन
इससे पहले रामेश्वरम भवन में अखिल भारतीय वनवासी कार्यकर्ता सम्मेलन का उद्घाटन जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर श्रीजी महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने वनवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ने के आश्रम के प्रयासों को पुण्य कार्य बताया। राष्ट्रीय महामंत्री योगेश बापट ने आश्रम की कल्याणकारी गतिविधियों की जानकारी दी। सम्मेलन में देशभर से 350 से अधिक पदाधिकारियों की सहभागिता प्रस्तावित है।