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श्रावण में रुद्राभिषेक और जप से मिलती है विशेष फल की प्राप्ति, मनोकामना के अनुसार करें अभिषेक: आचार्य बिमलेश ओझा बक्सर । श्रावण मास भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। बक्सर के आचार्य बिमलेश ओझा ने बताया कि इस पावन महीने में रुद्राभिषेक और शिव जप करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में विभिन्न कामनाओं की सिद्धि के लिए अलग-अलग द्रव्यों से रुद्राभिषेक का विधान बताया गया है। आचार्य ओझा के अनुसार रोग शांति के लिए कुशोदक, पुत्र प्राप्ति के लिए दूध, धन प्राप्ति के लिए ईख के रस या मधु, मोक्ष की कामना के लिए गंगाजल, जड़ बुद्धि के नाश के लिए गुड़ मिश्रित जल, वर्षा की कामना के लिए जल, पशुधन की प्राप्ति के लिए दही तथा वंश वृद्धि के लिए घी से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना विशेष फलदायी माना गया है। उन्होंने बताया कि रुद्राभिषेक मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है पाठात्मक और अभिषेकात्मक। दोनों का धार्मिक महत्व समान है। श्रावण मास में किसी भी दिन श्रद्धा और विधि-विधान से रुद्राभिषेक किया जा सकता है। आचार्य ने कहा कि यदि श्रद्धालु मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर अभिषेक करने नहीं जा सकते, तो घर पर पार्थिव (मिट्टी के) शिवलिंग या नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना कर योग्य ब्राह्मण के मार्गदर्शन में पूजन एवं रुद्राभिषेक कर सकते हैं। पूजन के उपरांत ब्राह्मण को फल, वस्त्र एवं दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों का आशीर्वाद जीवन में शुभ फल प्रदान करने वाला माना गया है। श्रद्धालु अधिक जानकारी या धार्मिक परामर्श के लिए आचार्य बिमलेश ओझा से मोबाइल नंबर 9006846631 पर संपर्क कर सकते हैं।

Buxar, Buxar | Jul 26, 2026
श्रावण में रुद्राभिषेक और जप से मिलती है विशेष फल की प्राप्ति, मनोकामना के अनुसार करें अभिषेक: आचार्य बिमलेश ओझा बक्सर । श्रावण मास भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। बक्सर के आचार्य बिमलेश ओझा ने बताया कि इस पावन महीने में रुद्राभिषेक और शिव जप करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में विभिन्न कामनाओं की सिद्धि के लिए अलग-अलग द्रव्यों से रुद्राभिषेक का विधान बताया गया है। आचार्य ओझा के अनुसार रोग शांति के लिए कुशोदक, पुत्र प्राप्ति के लिए दूध, धन प्राप्ति के लिए ईख के रस या मधु, मोक्ष की कामना के लिए गंगाजल, जड़ बुद्धि के नाश के लिए गुड़ मिश्रित जल, वर्षा की कामना के लिए जल, पशुधन की प्राप्ति के लिए दही तथा वंश वृद्धि के लिए घी से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना विशेष फलदायी माना गया है। उन्होंने बताया कि रुद्राभिषेक मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है पाठात्मक और अभिषेकात्मक। दोनों का धार्मिक महत्व समान है। श्रावण मास में किसी भी दिन श्रद्धा और विधि-विधान से रुद्राभिषेक किया जा सकता है। आचार्य ने कहा कि यदि श्रद्धालु मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर अभिषेक करने नहीं जा सकते, तो घर पर पार्थिव (मिट्टी के) शिवलिंग या नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना कर योग्य ब्राह्मण के मार्गदर्शन में पूजन एवं रुद्राभिषेक कर सकते हैं। पूजन के उपरांत ब्राह्मण को फल, वस्त्र एवं दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों का आशीर्वाद जीवन में शुभ फल प्रदान करने वाला माना गया है। श्रद्धालु अधिक जानकारी या धार्मिक परामर्श के लिए आचार्य बिमलेश ओझा से मोबाइल नंबर 9006846631 पर संपर्क कर सकते हैं। - Buxar News