
श्रीराम कथा का सातवां दिन: केवट संवाद की मार्मिक व्याख्या सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
बहादुर नगर (मोहम्मदी)। ग्राम पंचायत बहादुर नगर में 14 अगस्त से आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव का आज सातवां दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच संपन्न हुआ। कथा के अभी दो दिवस शेष हैं। आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण का लाभ लेने की अपील की है।
कथा व्यास पूज्य श्री अवधेश मिश्रा जी महाराज ने रामचरितमानस के अयोध्या कांड में वर्णित प्रसिद्ध केवट संवाद का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि यह प्रसंग भक्त और भगवान के बीच प्रेम, समर्पण, विनम्रता और अटूट श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीराम वनगमन के दौरान गंगा तट पर पहुंचे और केवट से नाव मांगी, तब केवट ने तत्काल नाव नहीं लाई। उसे विश्वास था कि प्रभु के चरणों की धूल में अद्भुत शक्ति है, जिसने अहिल्या का उद्धार कर उसे पुनः मानव रूप प्रदान किया था।
कथाव्यास ने चौपाइयों का भावार्थ बताते हुए कहा कि केवट को भय था कि यदि प्रभु के चरण उसकी नाव पर पड़ गए तो कहीं उसकी नाव भी किसी दिव्य रूप में परिवर्तित न हो जाए। इसलिए उसने भगवान श्रीराम के चरण पखारने का आग्रह किया। यह केवल एक शर्त नहीं, बल्कि प्रभु के प्रति उसकी अनन्य भक्ति और सेवा भाव का प्रतीक था।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्त और भगवान के इस अलौकिक संवाद को बड़े मनोयोग से सुना। केवट की विनम्रता, बुद्धिमत्ता और निष्काम भक्ति का वर्णन सुनकर उपस्थित श्रोता भावविभोर हो उठे।
कथाव्यास श्री अवधेश मिश्रा जी ने कहा कि केवट संवाद हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता। प्रेम, सेवा और समर्पण के माध्यम से ही भगवान की कृपा प्राप्त की जा सकती है।
श्रीराम कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। आयोजक समिति ने सभी क्षेत्रवासियों से शेष दो दिनों की कथा में उपस्थित होकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया है।