
स्कूली वाहनों की सघन जांच से हड़कंप, लेकिन बड़ा सवाल—क्या सिर्फ अभियान से बच्चों की सुरक्षा की गारंटी मिल जाएगी?
डीएम और एसपी के निर्देश पर चला विशेष अभियान, फिटनेस से लेकर फायर एक्सटिंग्विशर तक की हुई जांच, नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी
जनपद में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सोमवार को प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आया।
जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय एवं पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह के निर्देश पर यातायात पुलिस ने विभिन्न विद्यालयों के स्कूली वाहनों का विशेष सघन जांच अभियान चलाया।
अभियान का नेतृत्व यातायात प्रभारी वीर बहादुर सिंह ने अपनी टीम के साथ किया।
जांच के दौरान वाहनों में सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया गया।
यातायात टीम ने वाहनों में फायर एक्सटिंग्विशर, इमरजेंसी गेट, फर्स्ट एड बॉक्स, वाहन की फिटनेस, बीमा, परमिट, प्रदूषण प्रमाण-पत्र (PUC), चालक का वैध ड्राइविंग लाइसेंस तथा निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने जैसे बिंदुओं की जांच की।
अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन और वाहन संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नियमों का उल्लंघन मिलने पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है...
हर वर्ष स्कूल खुलने पर ऐसे अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन क्या उसके बाद भी नियमित निगरानी होती है?
क्या जिले के सभी स्कूली वाहनों में आज भी फायर एक्सटिंग्विशर, फर्स्ट एड बॉक्स और इमरजेंसी गेट पूरी तरह कार्यशील हैं?
क्या ओवरलोडिंग करने वाले वाहनों पर रोजाना कार्रवाई होती है या सिर्फ अभियान के दिन ही जांच होती है?
क्या बिना फिटनेस, बिना परमिट या बिना बीमा वाले वाहन अब भी बच्चों को ढो रहे हैं?
क्या सभी स्कूल अपने ड्राइवरों का समय-समय पर मेडिकल परीक्षण और पुलिस सत्यापन कराते हैं?
क्या परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से हर महीने निरीक्षण करेंगे?
अगर किसी वाहन में गंभीर खामी मिलने के बाद भी वह अगले दिन फिर सड़क पर उतर जाए, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
हर हादसे के बाद जागता है सिस्टम?
देश और प्रदेश में कई बार स्कूली वाहनों से जुड़े दर्दनाक हादसे सामने आ चुके हैं।
हर घटना के बाद जांच अभियान तेज होता है, लेकिन कुछ समय बाद व्यवस्था फिर पहले जैसी दिखाई देने लगती है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सुरक्षा केवल अभियान तक सीमित रहेगी या इसे स्थायी व्यवस्था बनाया जाएगा?
यातायात प्रभारी वीर बहादुर सिंह ने कहा कि स्कूली बच्चों की सुरक्षित यात्रा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जनपद में समय-समय पर ऐसे अभियान चलते रहेंगे और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब आपकी बारी...
क्या आपको लगता है कि स्कूली वाहनों की जांच हर सप्ताह होनी चाहिए?
क्या नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर भी आर्थिक दंड और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए?
क्या आपके क्षेत्र में स्कूली वाहन सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं?
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
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Jalaun, Jalaun | Jul 14, 2026