
मुरैना की सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान, 505 पांडुलिपियां हुईं पंजीकृत
मुरैना । भारत सरकार के ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत मुरैना जिले में अब तक 505 हस्तलिखित पांडुलिपियों का सफलतापूर्वक पंजीयन किया जा चुका है। यह उपलब्धि जिले की समृद्ध सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इसी क्रम में मुरैना स्थित श्री गोपालदास दिगंबर जैन संस्कृत विद्यालय में संरक्षित 80 दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियों का पंजीयन एवं दस्तावेजीकरण किया गया। संस्कृत, प्राकृत एवं हिन्दी भाषाओं में लिखित ये पांडुलिपियाँ 17वीं से 20वीं शताब्दी के मध्य की हैं और भारतीय धार्मिक, दार्शनिक तथा सांस्कृतिक परंपराओं के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कमलेश कुमार भार्गव के मार्गदर्शन में संपन्न इस कार्य में पुरातत्व विभाग के अशोक शर्मा एवं भोपाल के पुरातत्वविद् नवनीत कुमार जैन ने पांडुलिपियों के परीक्षण, पंजीयन और दस्तावेजीकरण की जिम्मेदारी निभाई।
विशेषज्ञों के अनुसार ये पांडुलिपियाँ भारतीय ज्ञान परंपरा, धार्मिक इतिहास, लेखन-कला और सांस्कृतिक विकास की महत्वपूर्ण साक्षी हैं। इनमें निहित सामग्री तत्कालीन समाज, धर्म, दर्शन, साहित्य एवं ज्ञान-विज्ञान से जुड़ी अमूल्य जानकारी प्रदान करती है।
ज्ञान भारतम् मिशन के तहत इन पांडुलिपियों का डिजिटल अभिलेखीकरण भी किया जा रहा है, जिससे देश की इस अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित कर शोध एवं अध्ययन के लिए व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराया जा सके। यह पहल भारत की समृद्ध ज्ञान-संपदा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।