
जब एसपी ने अपने ही थानेदार को जेल भेजा
पुलिस की वर्दी कानून की ताकत देती है, लेकिन वही ताकत जब नागरिकों को डराने और पैसे वसूलने का हथियार बनने लगे तो पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। गोपालगंज के जादोपुर थाने का ताजा मामला इसी वजह से गंभीर है।
16 अगस्त को गोपालगंज के एसपी विनय तिवारी को सूचना मिली कि जादोपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष अनिल राम अपने पद का कथित दुरुपयोग कर रहे हैं और लोगों से अवैध पैसे की मांग की जा रही है। एसपी ने शिकायत को दबाने के बजाय मुख्यालय डीएसपी से जांच कराई। जांच के बाद थानाध्यक्ष समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
आरोप और भी गंभीर हैं। जांच में आम लोगों को केस में फंसाने या नाम हटाने के नाम पर कुल 1.80 लाख रुपये की कथित वसूली सामने आने की बात एसपी ने बताई है। कुछ लोगों को करीब 36 घंटे तक बिना प्राथमिकी या कानूनी अनुमति के थाने में रखने का आरोप भी है।
पुलिस की साख अपराधियों को पकड़ने से जितनी बनती है, उतनी ही अपने भीतर के भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करने से भी बनती है।
अगर इस मामले में एसपी ने सचमुच अपने ही थानेदार पर कानून का इस्तेमाल किया है, तो यह पुलिस व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक उदाहरण है। लेकिन असली परीक्षा आगे है—क्या जांच निष्पक्ष होगी, क्या दोष सिद्ध होने पर सजा होगी और क्या पीड़ित नागरिकों को न्याय मिलेगा?
वर्दी की असली ताकत यही है कि वह कानून को दूसरों पर ही नहीं, अपने ऊपर भी लागू करने का साहस रखे।
Bihar, India | Aug 21, 2026