
हमारे दादा-परदादाओं ने हमारे लिए तालाब बनाए, पेड़ लगाए, जंगलों को संरक्षित रखा और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जिया। यही कारण था कि वे स्वच्छ हवा, शुद्ध पानी और प्राकृतिक वातावरण में 90 से 100 वर्ष या उससे अधिक तक स्वस्थ जीवन जी सके।
लेकिन आज हम विकास के नाम पर तालाब पाट रहे हैं, पेड़ काट रहे हैं, जल स्रोतों पर अतिक्रमण कर रहे हैं और पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसका परिणाम यह है कि बीमारियां बढ़ रही हैं, पानी का संकट गहरा रहा है और हमारी औसत आयु भी प्रभावित हो रही है।
यदि यही स्थिति बनी रही और प्रशासन तथा समाज मिलकर अतिक्रमणकारियों और पर्यावरण विनाश को रोकने में असफल रहे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए हम क्या छोड़कर जाएंगे? बैंक बैलेंस, प्लॉट और इमारतें तब किसी काम की नहीं होंगी, जब पीने का पानी, स्वच्छ हवा और प्राकृतिक संसाधन ही नहीं बचेंगे।
समय रहते हमें निर्णय लेना होगा कि हम अपने बच्चों को कंक्रीट का जंगल देना चाहते हैं या जीवन देने वाला पर्यावरण। तालाब, पेड़ और जल स्रोतों की रक्षा करना केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य का संरक्षण है।
"प्रकृति हमारी विरासत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों से लिया गया उधार है। इसे सुरक्षित लौटाना हमारी जिम्मेदारी है।"
🌿💧 तालाब बचाओ — भविष्य बचाओ
🌳 पेड़ बचाओ — जीवन बचाओ
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