
*'प्रोजेक्ट जागृति– बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम' के तहत मिशन उदय-2.0 को सफल बनाने पर विशेष जोर*
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*उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग के सभी पदाधिकारियों एवं चिकित्सकों के साथ की विस्तृत चर्चा*
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*बरसाती मौसम में मलेरिया एवं डायरिया की रोकथाम को लेकर दिए आवश्यक दिशा-निर्देश*
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पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार से जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में "प्रोजेक्ट जागृति- बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम" के अंतर्गत संचालित मिशन उदय-2.0 के प्रभावी संचालन एवं बरसात के मौसम में संचारी रोगों की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों एवं चिकित्सकों के साथ वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। बैठक में सिविल सर्जन, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी, जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सा पदाधिकारी, विभिन्न स्वास्थ्य उपकेंद्रों के चिकित्सक तथा स्वास्थ्य विभाग के अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
बैठक में उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने मिशन उदय-2.0 के अंतर्गत जिले में संचालित गतिविधियों के संदर्भ में कहा कि वर्षा ऋतु के दौरान मलेरिया, डायरिया एवं अन्य जलजनित तथा वेक्टर जनित रोगों की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे समय में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पूरी गंभीरता, संवेदनशीलता एवं समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक गांव एवं पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मिशन उदय-2.0 का उद्देश्य केवल बीमारियों का उपचार करना नहीं, बल्कि समय रहते उनकी रोकथाम, शीघ्र पहचान तथा व्यापक जनजागरूकता के माध्यम से लोगों को स्वस्थ एवं सुरक्षित रखना है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रत्येक पदाधिकारी एवं कर्मी को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं, मलेरिया जांच किट, ओआरएस पैकेट, जिंक टैबलेट, आवश्यक चिकित्सकीय उपकरणों एवं अन्य स्वास्थ्य सामग्रियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही किसी भी क्षेत्र से मलेरिया अथवा डायरिया के मरीजों की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल जांच, उपचार एवं आवश्यक नियंत्रणात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक के दौरान मलेरिया उन्मूलन अभियान के अंतर्गत नियमित बुखार सर्वेक्षण, संदिग्ध मरीजों की समय पर जांच, पॉजिटिव मरीजों का त्वरित उपचार, वेक्टर नियंत्रण गतिविधियों तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। वहीं डायरिया की रोकथाम के लिए स्वच्छ पेयजल के उपयोग, व्यक्तिगत स्वच्छता, हाथ धोने की आदत, खुले में शौच से बचाव तथा ओआरएस एवं जिंक के उपयोग के संबंध में व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित करने पर विशेष बल दिया गया।
उपायुक्त ने सभी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि सहिया, एएनएम, मल्टीपरपज हेल्थ वर्कर एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से गांव-गांव तथा घर-घर संपर्क स्थापित कर लोगों को मलेरिया एवं डायरिया के कारण, लक्षण, बचाव के उपाय तथा समय पर उपचार के महत्व के संबंध में विस्तार से जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी एवं जनजागरूकता के माध्यम से ही इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में रोगियों के उपचार की समुचित व्यवस्था बनाए रखें तथा गंभीर मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर करने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। साथ ही सभी प्रखंडों से रोगों की नियमित मॉनिटरिंग एवं प्रतिवेदन समय पर उपलब्ध कराया जाए, ताकि जिला स्तर से सतत समीक्षा करते हुए आवश्यक निर्णय लिए जा सकें।
उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य जिले के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना तथा मलेरिया। एवं डायरिया जैसी मौसमी बीमारियों से जनसामान्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से टीम भावना के साथ कार्य करने तथा प्रशासन द्वारा संचालित स्वास्थ्य कार्यक्रमों को शत-प्रतिशत प्रभावी ढंग से धरातल पर क्रियान्वित करने का आह्वान किया।