
धान की फसल को कीट-रोगों से बचाने के लिए कृषि विभाग की पहल, किसानों को दी जा रही वैज्ञानिक सलाह
वैशाली। जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह के निर्देश पर धान की फसल को संभावित कीट एवं रोगों के प्रकोप से बचाने के लिए कृषि विभाग ने विशेष पहल शुरू की है। विभाग द्वारा किसानों को फसल की नियमित निगरानी, शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर वैज्ञानिक प्रबंधन उपाय अपनाने की जानकारी दी जा रही है।
कृषि विभाग के अनुसार खेतों में पानी का स्तर घटने के साथ धान की फसल में शीथ ब्लाइट, शीथ रॉट, तना छेदक और भूरा तना मधुआ (Brown Plant Hopper) के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है। किसानों को खेत और आसपास की मेड़ों को खरपतवार मुक्त रखने तथा नाइट्रोजन उर्वरक का इस्तेमाल अनुशंसित मात्रा में ही करने की सलाह दी गई है।
भूरा तना मधुआ के अधिक प्रकोप की स्थिति में फसल प्रभावित या सूखती हुई दिखाई दे सकती है। इसके नियंत्रण के लिए विभाग ने अनुशंसित विधि से Acephate 75% WP का प्रयोग करने की सलाह दी है। वहीं तना छेदक की रोकथाम के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाने तथा अधिक प्रकोप की स्थिति में Cartap Hydrochloride 4G के प्रयोग की सलाह दी गई है।
शीथ ब्लाइट रोग में पत्तियों पर हरे-भूरे रंग के अनियमित धब्बे दिखाई दे सकते हैं। इसके प्रबंधन के लिए विभाग द्वारा Carbendazim 50% WP तथा जैविक नियंत्रण के लिए Trichoderma harzianum 1% WP के अनुशंसित प्रयोग की जानकारी दी गई है।
जिला पदाधिकारी ने किसानों से अपील की है कि वे धान की फसल का नियमित निरीक्षण करें और कीट या रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तत्काल आवश्यक प्रबंधन उपाय अपनाएं। कीटनाशी एवं फफूंदनाशी का प्रयोग केवल अनुशंसित मात्रा और विधि के अनुसार सुरक्षा सावधानियों के साथ करने की सलाह दी गई है।
कृषि विभाग ने किसानों से फसल में किसी भी प्रकार के कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर संबंधित कृषि पदाधिकारियों एवं कृषि कर्मियों से संपर्क कर विशेषज्ञ सलाह लेने की अपील की है, ताकि समय रहते फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।
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