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धरना, अनशन और राजनीति: क्या पांगी की समस्याएं केवल विरोध का मुद्दा बनकर रह गई हैं? पांगी घाटी की मूलभूत समस्याएं आज की नहीं हैं। वर्षों से यहां बिजली की अनियमित आपूर्ति, जर्जर सड़कें, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति, दूरसंचार की खराब व्यवस्था और विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की भारी कमी जैसी समस्याएं लोगों के जीवन को प्रभावित करती रही हैं। इन मुद्दों पर समय-समय पर आवाजें उठती रही हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज भी दूर दिखाई देता है। पिछले लगभग दो वर्षों से भाजपा मंडल पांगी इन समस्याओं को लेकर लगातार मुखर रही है। कभी भूख हड़ताल, कभी क्रमिक अनशन और कभी धरना-प्रदर्शन के माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया। लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन एक वैध और संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसके साथ यह सवाल भी उठना स्वाभाविक है कि क्या बार-बार एक ही मुद्दों पर आंदोलन करना केवल राजनीतिक रणनीति का हिस्सा तो नहीं बन गया है? यदि पिछले वर्ष भी इन्हीं मांगों को लेकर भूख हड़ताल हुई थी, तो यह जानना जनता का अधिकार है कि उस आंदोलन से आखिर कितनी समस्याओं का समाधान हुआ? यदि अधिकांश मांगें आज भी ज्यों की त्यों हैं, तो यह आत्ममंथन सभी पक्षों के लिए आवश्यक है कि आखिर कमी कहां रह गई। यह भी याद रखना होगा कि हिमाचल प्रदेश की राजनीति में दशकों से सत्ता कांग्रेस और भाजपा के बीच बदलती रही है। ऐसे में पांगी की वर्तमान समस्याओं का पूरा दोष केवल किसी एक सरकार पर डालना वास्तविकता से परे होगा। इन समस्याओं की जड़ें वर्षों पुरानी हैं और इनके लिए दोनों प्रमुख राजनीतिक दल किसी न किसी रूप में जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। राजनीति केवल विरोध तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जब भाजपा सत्ता में थी, तब क्या इन मुद्दों पर उतनी ही गंभीरता दिखाई गई? क्या उस समय अपनी ही सरकार से पांगी के विकास को लेकर कठोर सवाल पूछे गए? यदि नहीं, तो आज केवल विपक्ष में रहकर संघर्ष करना जनता के मन में स्वाभाविक रूप से कई प्रश्न खड़े करता है। इसी प्रकार वर्तमान परिस्थितियों में भी केवल राज्य सरकार पर सवाल उठाना पर्याप्त नहीं है। पांगी का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक और सांसद भी जनता के प्रति समान रूप से जवाबदेह हैं। यदि विधायक और सांसद भाजपा से हैं, तो यह जानना भी आवश्यक है कि उन्होंने पांगी की समस्याओं को दूर करने के लिए अब तक क्या ठोस प्रयास किए हैं। क्या इन मुद्दों को संसद या अन्य संबंधित मंचों पर प्रभावी ढंग से उठाया गया? क्या सांसद निधि का पर्याप्त उपयोग पांगी के विकास कार्यों में हुआ? यदि हुआ, तो उसका विवरण जनता के सामने आना चाहिए, और यदि नहीं हुआ, तो उसके कारण भी स्पष्ट होने चाहिए। लोकतंत्र में स्वस्थ राजनीति का अर्थ केवल धरना और प्रदर्शन नहीं, बल्कि जवाबदेही भी है। जनता को यह अधिकार है कि वह सत्ता पक्ष से भी सवाल पूछे और विपक्ष से भी। विरोध केवल तब सार्थक होगा, जब उसके साथ समाधान की स्पष्ट रूपरेखा और परिणाम भी दिखाई दें। पांगी जैसे दुर्गम और जनजातीय क्षेत्र को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का अखाड़ा नहीं, बल्कि दीर्घकालिक विकास की आवश्यकता है। सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं किसी दल विशेष का नहीं, बल्कि हर नागरिक का अधिकार हैं। इसलिए समय की मांग है कि सभी राजनीतिक दल दलगत हितों से ऊपर उठकर पांगी के विकास के लिए साझा रोडमैप तैयार करें। अंततः सबसे बड़ा प्रश्न यही है—क्या पांगी की समस्याएं वास्तव में समाधान की दिशा में बढ़ रही हैं, या फिर वे हर चुनाव और हर आंदोलन में केवल राजनीतिक विमर्श का विषय बनकर रह गई हैं? #Editorial #Opinion #Pangi #HimachalPradesh #Chamba #Politics #PublicIssues #Development #GoodGovernance #Accountability #PublicVoice #Democracy #Infrastructure #RoadConnectivity #Healthcare #Electricity #Telecommunication #TribalAreas #RuralDevelopment #PeopleFirst हिम संदेश Pangi Administration Adv Surjeet Sharma Bharmouri Sukhvinder Singh Sukhu Janak Raj Kangana Ranaut

Saach, Chamba | Jul 12, 2026

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