
राजीविका से सशक्त हुईं अनीता, छोटे कारोबार से बनाई आर्थिक मजबूती
समूह से मिला ऋण, मेहनत से बढ़ा कारोबार - अनीता बनीं आत्मनिर्भर
धौलपुर, 22 सितम्बर। विकसित भारत-जन सेवा अभियान के अंतर्गत सेवा की कहानी के माध्यम से जिले में विभिन्न योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बन रहे और लगातार बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में ग्राम महुआखेड़ा तहसील बाड़ी की अनीता की कहानी मेहनत, लगन और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल है।
अनीता ने अपने जीवन में आर्थिक बदलाव लाने के उद्देश्य से राजीविका समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें ऋण प्राप्त करने का अवसर मिला। इस ऋण का उपयोग उन्होंने अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने में किया और दुकान खोलकर अपने स्वरोजगार की शुरुआत की।
छोटी दुकान से शुरू हुआ सफर
अनीता के लिए अपनी दुकान शुरू करना आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम था। उन्होंने मेहनत और लगन से दुकान का संचालन किया और धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। दुकान से होने वाली आमदनी ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत होने में मदद की और उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई।
व्यवसाय के प्रति उनकी मेहनत और निरंतर प्रयासों से उन्हें आगे बढ़ने का हौसला मिला। अनीता ने अपने छोटे व्यवसाय को यहीं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे और विस्तार देने का निर्णय लिया।
बैंक ऋण से बढ़ाया कारोबार
अपने व्यवसाय को विस्तार देने के लिए अनीता ने बैंक से ऋण प्राप्त किया। बैंक से मिले ऋण का उपयोग करते हुए उन्होंने पहले की अपेक्षा बड़ी दुकान शुरू की। इस तरह छोटी दुकान से शुरू हुआ उनका सफर धीरे-धीरे बड़े व्यवसाय तक पहुंचा।
बड़ी दुकान के माध्यम से अब अनीता पहले की तुलना में अधिक बेहतर तरीके से अपना व्यवसाय संचालित कर रही हैं। व्यवसाय के विस्तार से उनकी आय में वृद्धि हुई और परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव आया।
आर्थिक स्थिति में आया सुधार
आज अनीता अपने व्यवसाय के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर हैं। नियमित रूप से व्यवसाय से होने वाली आय से परिवार की जरूरतों को पूरा करने में उन्हें मदद मिल रही है। उनके लिए राजीविका समूह से जुड़ना आर्थिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ।
अनीता बताती हैं कि राजीविका समूह से जुड़ने के बाद उन्हें ऋण के माध्यम से अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला। उन्होंने इस अवसर का सदुपयोग करते हुए पहले छोटी दुकान शुरू की और बाद में बैंक ऋण लेकर अपने व्यवसाय को विस्तार दिया। आज उनकी आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में बेहतर है।