छात्रों और युवाओं के विरोध प्रदर्शन से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बेहद मानवीय और व्यावहारिक टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI) ने कहा कि प्रदर्शनकारी युवाओं के साथ आक्रामक रुख अपनाने के बजाय उनसे बातचीत करने, उन्हें सुनने और काउंसलिंग देने की ज़रूरत है। CJI ने स्पष्ट किया कि अगर कुछ भटके हुए लोग गलत कदम भी उठा लें, तब भी स्थिति को सख्ती से दबाने के बजाय समझाना और शांतिपूर्ण समाधान निकालना ही बेहतर रास्ता है।
अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि सरकार या एजेंसियों का अत्यधिक आक्रामक रवैया समाज में तनाव को और बढ़ा सकता है, जिससे हर हाल में बचा जाना चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने माना कि कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों के पास ऐसी स्थितियों से निपटने का अनुभव होता है, लेकिन उन्हें हर परिस्थिति में संयम बरतना होगा ताकि मामला हाथ से न निकले। कोर्ट का मुख्य जोर लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बढ़ावा देने और संयम बनाए रखने पर रहा।
#SupremeCourt #CJI #YouthProtest #LawAndOrder #IndianJudiciary #BreakingNews #DelhiNews #FatafatNews