
बिग ब्रेकिंग़: क्षत्रिय राजनीतिक ताकतों में दरार!
यूकेडी के युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष आशीष नेगी ने पूर्व में यूकेडी से जुड़े आशुतोष नेगी के लिए फेसबुक में लिखा पत्र!
आशीष नेगी लिखते हैं कि......
कभी आप मेरी नजर में हीरो थे, आज आपके खिलाफ लिखना पड़ रहा है। आखिर क्यों?
आशुतोष नेगी जी, आज बहुत टूटे मन से लिख रहा हूँ। हमने समाज को न्याय दिलाने के लिए साथ जेल काटी, संघर्ष किया। मैंने आपका सम्मान किया, आपके पैर छुए। आपने कहा अंधेरे में कूद जाओ, तो मैंने भरोसा करके वो भी किया। लेकिन आज आप जिस रास्ते पर चल रहे हैं, उसे देखकर बहुत दुख हो रहा है।
आज लगातार मुझ पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है कि मैं आपकी तरफ आ जाऊँ, अन्यथा मुझे राजनीतिक रूप से नुकसान पहुँचाया जाएगा। कभी कहते हैं कि तुम्हारा वहाँ कोई भविष्य नहीं है।
अरे मान्यवर, बात मेरे भविष्य की नहीं है। बात मेरे पहाड़ी समाज के भविष्य की है। बात उन गाँवों की है, जहाँ आज भी सड़क नहीं है, उन माताओं की है, जिन्हें इलाज नहीं मिलता, उन युवाओं की है, जो रोजगार के लिए अपना पहाड़ छोड़ने को मजबूर हैं।
मैं यहाँ अपना भविष्य बनाने नहीं, अपने पहाड़ का भविष्य बचाने आया हूँ। गैरसैंण की स्थायी राजधानी, मूलनिवास, सशक्त भू-कानून और पहाड़ के अधिकारों की लड़ाई किसी एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं है।
राष्ट्रीय दलों से लड़ते हुए हमने कभी पीछे हटना नहीं सीखा। आज अगर अपने ही लोगों के बीच अपने विचारों की रक्षा के लिए लड़ना पड़ेगा, तो वो भी लड़ेंगे। हमारी मेहनत को कमजोर करने की कोशिश होगी, तो उसका जवाब भी दिया जाएगा।
और मान्यवर, गैरसैंण आने के लिए पुलिस प्रोटेक्शन की जरूरत क्यों पड़ रही है? आखिर इतना डर क्यों? अगर हम पहाड़ के हितों के लिए काम कर रहे हैं, तो फिर आपस में संवाद करने और जनता के बीच जाने से डर कैसा?
कभी काशी सिँह ऐरी जी पर आरोप, कभी सुरेन्द्र कुकरेती जी पर आरोप और अब मेरे खिलाफ साजिश की बातें। आखिर क्यों? क्या हम पहाड़ के मूल मुद्दों से भटककर एक-दूसरे को कमजोर करने में लग गए हैं?
मुझे सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि जिस व्यक्ति का मैंने कभी इतना सम्मान किया, आज उसी के खिलाफ लिखना पड़ रहा है। मैंने जितनी शिद्दत से आपका साथ दिया, आज उतनी ही शिद्दत से अपने विचारों और अपने संगठन के लिए खड़ा रहूँगा।
मान्यवर, आप कहते हैं कि मेरा भविष्य वहाँ नहीं है। मैं कहता हूँ कि मुझे अपने व्यक्तिगत भविष्य की चिंता नहीं है। मुझे चिंता उस पहाड़ की है, जहाँ के लोगों ने अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए उत्तराखंड राज्य की लड़ाई लड़ी थी।
हम भाजपा और कांग्रेस से पहाड़ के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं और लड़ते रहेंगे। अगर आज आपसे भी अपने सिद्धांतों की लड़ाई लड़नी पड़ी, तो पीछे नहीं हटेंगे।
जय पहाड़ - जय पहाड़ी 🙏
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