
सीटू-हिमाचल किसान सभा एवं स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा किया गया जोरदार प्रदर्शन
कुल्लू टुडे न्यूज़
रामपुर 10 अगस्त 2026
आज रामपुर में सीटू-हिमाचल किसान सभा तथा स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया ने केंद्र की मोदी सरकार की मजदूर-किसान, छात्र एवं आम जनता विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया तथा गिरफ्तारियां भी दी।
हिमाचल किसान सभा के राज्य महासचिव राकेश सिंघा, सीटू जिला शिमला के अध्यक्ष कुलदीप सिंह, संजीव जोशी, नील दत्त शर्मा, दिनेश मेहता, हिमाचल किसान सभा के राज्य सचिव देवकी नंद, जिला अध्यक्ष रणजीत, महासचिव प्रेम चौहान, हिमाचल सेब उत्पादक संघ के राज्य महासचिव पूर्ण ठाकुर तथा छात्र नेता राहुल विद्यार्थी ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा—
“1942 में नारा था ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’। आज नारा है ‘मजदूर-किसान विरोधी नीतियां वापस लो’। तब अंग्रेजों ने देश को कंगाल बनाया था। आजादी के 79 वर्ष बाद भी मोदी सरकार वही काम कर रही है—बेरोजगारी बढ़ा रही है, महंगाई आसमान छू रही है, अमीर-गरीब की खाई गहरी कर रही है और आम आदमी के अधिकारों को कुचल रही है।
44 श्रम कानूनों को समाप्त कर मजदूरों के संगठन, हड़ताल और आवाज उठाने के अधिकार पर ताला जड़ दिया गया है। फिक्स्ड टर्म रोजगार और ‘मित्र’ योजनाओं के नाम पर स्थायी नौकरियां समाप्त की जा रही हैं। ईपीएफ एवं ईएसआई को कमजोर किया गया है। आउटसोर्सिंग के माध्यम से शोषण चरम पर पहुँच गया है। हड़ताल करने वाले मजदूरों पर ‘देशद्रोह’ के मुकदमे थोपे जा रहे हैं। गाजियाबाद-नोएडा के मजदूर आज भी जेल की सलाखों के पीछे हैं। देश में अघोषित आपातकाल का माहौल बना हुआ है।
आंगनवाड़ी, मिड-डे मील और आशा वर्कर्स को मात्र मानदेय की भीख दी जा रही है। वर्षों की सेवा के बावजूद न तो नियमितीकरण हुआ है और न ही कोई सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध है। मनरेगा को कमजोर करके महिलाओं तथा निर्माण मजदूरों का रोजगार छीन लिया गया है।
सबसे बड़ा खतरा अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील है। अमेरिकी अनाज, सेब, फल और दूध के आने से हिमाचल के बागवान, किसान और दूध उत्पादक पूरी तरह तबाह हो जाएंगे। न्यूजीलैंड तथा यूरोपीय संघ के साथ किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौते भी किसानी की जड़ें काट रहे हैं। बीज विधेयक, स्मार्ट मीटर और बिजली बोर्ड का निजीकरण—ये सब देश की कृषि एवं अर्थव्यवस्था को विदेशी कंपनियों के हवाले करने की साजिश हैं। पहले अंग्रेजी साम्राज्यवाद था, अब अमेरिकी साम्राज्यवाद की गुलामी थोपी जा रही है।
खेती बचाओ—उद्योग बचाओ—भारत बचाओ!
संघर्ष की प्रमुख मांगें :-
हिमाचल किसान सभा और सीटू ने स्पष्ट घोषणा की है कि किसानों तथा मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक निम्न प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती—
1. चार मजदूर विरोधी श्रम संहिताएं तुरंत वापस ली जाएं तथा 44 श्रम कानून बहाल किए जाएं।
2. न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रति माह घोषित किया जाए।
3. भारत-अमेरिका ट्रेड डील रद्द की जाए।
4. न्यूजीलैंड तथा यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते रद्द किए जाएं।
5. मनरेगा को बहाल किया जाए, रोजगार गारंटी सुनिश्चित की जाए तथा वी.बी. ग्राम जी. योजना रद्द की जाए।
6. सेब, फल, अनाज एवं डेयरी उत्पादों को बर्बाद करने की नीति बंद की जाए।
7. खेती को कॉरपोरेट कंपनियों के हवाले करने की प्रक्रिया बंद की जाए।
8. बीज विधेयक वापस लिया जाए।
9. स्मार्ट मीटर तथा बिजली बोर्ड के निजीकरण को तत्काल रोका जाए।
10. आंगनवाड़ी, मिड-डे मील एवं आशा वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए तथा ग्रेच्युटी, पीएफ, मेडिकल एवं पेंशन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
11. आउटसोर्स, ठेका, सेवा मित्र एवं मल्टी टास्क वर्कर्स को नियमित किया जाए।
12. श्रमिक कल्याण बोर्ड के लंबित लाभ 30 अक्टूबर 2026 तक जारी किए जाएं।
13. वन मित्र, रोगी मित्र, श्रमिक मित्र, ट्रैफिक मित्र, जॉब ट्रेनी, कैजुअल, मल्टी टास्क तथा आउटसोर्स वर्कर्स को नियमित किया जाए।
14. रामपुर एवं लुहरी परियोजना से प्रभावित किसानों को फसल क्षति, दरारों तथा एक प्रतिशत रॉयल्टी का भुगतान तुरंत किया जाए।
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