'कानून अंधा होता है' यह कहावत तो सबने सुनी है, लेकिन बुधवार को बाड़मेर ग्रामीण पंचायत क्षेत्र में कानून के इसी 'अंधे' और बेरहम रूप ने एक बेबस परिवार की आखिरी उम्मीद को भी मलबे के ढेर में दफन कर दिया। जिला मुख्यालय पर जब प्रशासन की जेसीबी मशीनें सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने आगे बढ़ीं, तो वहां कोई हिंसक उपद्रव नहीं हुआ, बल्कि बेबसी, आंसुओं और ममता की एक ऐसी दास्तान लिखी गई, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं।
यह कहानी किसी रसूखदार भू-माफिया की नहीं, बल्कि एक ऐसी बेबस मां की है जिसके घर में कमाने वाला कोई पुरुष नहीं है, और उसकी उन बेटियों की है जिन्होंने अपने आशियाने को बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी।