
*मऊगंज में फर्जी तरीके से चल रहा दांतों का निजी क्लीनिक*
*झोलाछाप बंगाली डॉक्टर बन बैठे डेंटिस्ट, जिला प्रशासन मौन*
*मऊगंज।* मऊगंज में दांतों के इलाज के नाम पर संचालित निजी क्लीनिक की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि यहां *बिना वैध डेंटल योग्यता के कथित झोलाछाप व्यक्ति खुद को डेंटिस्ट बताकर सिविल अस्पताल के पास ही अपनी निजी क्लीनिक में मरीजों का उपचार कर रहा है।* हैरानी की बात यह है कि पूरे मामले को लेकर जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक संबंधित व्यक्ति को *‘बंगाली डॉक्टर’* के नाम से जाना जाता है और किराए के मकान में वह अपनी निजी क्लीनिक में मरीजों के दांतों का इलाज करता है। सवाल यह है कि आखिर *क्या उसके पास दंत चिकित्सक के रूप में इलाज करने की मान्य डिग्री और पंजीयन है?* यदि है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही और यदि नहीं है तो खुलेआम मरीजों का उपचार कैसे किया जा रहा है?
*डिग्री और पंजीयन की जांच जरूरी*
दांतों के इलाज के लिए विशेषज्ञता और निर्धारित चिकित्सा योग्यता जरूरी होती है। ऐसे में किसी गैर-योग्य व्यक्ति द्वारा मरीजों का उपचार किए जाने की शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को तत्काल क्लीनिक की जांच कर *इस कथित झोलाछाप डॉक्टर की डिग्री, पंजीयन, क्लीनिक के दस्तावेज और वहां की जा रही चिकित्सा गतिविधियों* का सत्यापन करना चाहिए।
*आखिर मरीजों की सेहत से जुड़े मामले में प्रशासन कब जागेगा?* क्या किसी बड़ी घटना के बाद ही जांच और कार्रवाई की जाएगी?
यदि संबंधित व्यक्ति के पास वैध डिग्री और पंजीयन है तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं यदि आरोप सही पाए जाते हैं और बिना आवश्यक योग्यता के उपचार किया जा रहा है तो मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए नियमानुसार कार्रवाई आवश्यक होगी।
*अब सवाल सीधे स्वास्थ्य विभाग से है—मऊगंज में दांतों के इलाज के नाम पर चल रहे कथित फर्जी क्लीनिक की जांच कब होगी और ‘बंगाली डॉक्टर’ की डिग्री व पंजीयन का सत्यापन कब किया जाएगा?*
Mauganj, Rewa | Oct 6, 2026