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Petrol News

@charming_alok
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*रीवा में गैस सिलेंडर का ‘खेल’! घर नहीं पहुंचता सिलेंडर, फिर भी वसूला जा रहा डिलीवरी चार्ज*

*वर्तिका एजेंसी रीवा पर उपभोक्ताओं के गंभीर आरोप: रेलवे अंडरब्रिज से कॉलेज चौराहे तक गाड़ी का इंतजार करते ग्राहक, ₹100 अतिरिक्त वसूली पर उठे सवाल*

*रीवा।* गैस सिलेंडर चाहिए तो बुकिंग के बाद घर पर डिलीवरी का इंतजार मत कीजिए… *एजेंसी की गाड़ी जहां खड़ी मिले, वहां पहुंचकर खुद सिलेंडर उठाइए!* रीवा की वर्तिका एजेंसी को लेकर सामने आई उपभोक्ताओं की शिकायतें कुछ ऐसा ही सवाल खड़ा कर रही हैं।

उपभोक्ताओं का आरोप है कि *रेलवे अंडरब्रिज, कॉलेज चौराहा, सांची सेंटर समेत अलग-अलग स्थानों पर एजेंसी की गाड़ी से सिलेंडर दिए जाते हैं?* यानी ग्राहक को सिलेंडर लेने के लिए खुद गाड़ी तक पहुंचना पड़ता है।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। शिकायत यह भी है कि *होम डिलीवरी के नाम पर ₹100 अतिरिक्त राशि* ली जा रही है। ऐसे में उपभोक्ता पूछ रहे हैं — *जब सिलेंडर घर तक पहुंचा ही नहीं, तो डिलीवरी का पैसा किस बात का?*

*₹970 से ₹1800 तक पहुंचा सिलेंडर?*

वर्तिका एजेंसी को लेकर एक और गंभीर शिकायत सामने आई है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि *करीब ₹970 वाला घरेलू गैस सिलेंडर कथित तौर पर ₹1800 तक में बेचा जा रहा है।*

अगर यह आरोप जांच में सही पाया जाता है, तो सवाल सिर्फ एक ग्राहक की जेब का नहीं, बल्कि *पूरी वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता* का होगा।

*अब विभाग की बारी*

एक तरफ ग्राहक खुद गाड़ी तक जाकर सिलेंडर लेने की बात कह रहे हैं, दूसरी तरफ डिलीवरी शुल्क और कथित अधिक कीमत वसूली के आरोप सामने हैं।

अब सवाल सीधा है— *क्या संबंधित विभाग वर्तिका एजेंसी की डिलीवरी व्यवस्था, बिलिंग और उपभोक्ताओं से ली जा रही अतिरिक्त राशि की जांच करेगा?*

*आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। वर्तिका एजेंसी रीवा का पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा ।*
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*रीवा में गैस डिलीवरी पर सवाल: घर तक नहीं पहुंच रहा सिलेंडर, फिर ₹100 किस बात के?*

वर्तिका एजेंसी पर उपभोक्ताओं के आरोप; रेलवे अंडरब्रिज, कॉलेज चौराहा और सांची सेंटर के पास गाड़ी से खुद सिलेंडर उठाने की शिकायत

*रीवा।* घरेलू गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी व्यवस्था को लेकर रीवा में *वर्तिका एजेंसी रीवा* पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसी की ओर से सिलेंडर घर तक पहुंचाने के बजाय कई स्थानों पर एजेंसी की गाड़ी से ही उपभोक्ताओं को सिलेंडर लेना पड़ता है।

उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि *रेलवे अंडरब्रिज, कॉलेज चौराहा और सांची सेंटर* सहित कुछ स्थानों के आसपास एजेंसी की गाड़ी पहुंचती है और लोग वहां से स्वयं सिलेंडर लेकर जाते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि सिलेंडर की वास्तविक होम डिलीवरी नहीं हो रही, तो *होम डिलीवरी के नाम पर लिया जाने वाला अतिरिक्त ₹100 शुल्क आखिर किस मद में वसूला जा रहा है?*

*₹970 के सिलेंडर पर ₹1800 तक का आरोप?*

इससे पहले एजेंसी को लेकर यह आरोप भी सामने आया है कि करीब *₹970 कीमत वाला घरेलू सिलेंडर कथित तौर पर ₹1800 तक में बेचा जा रहा है।* हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

यदि निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूली जा रही है और साथ ही उपभोक्ताओं को स्वयं वाहन तक जाकर सिलेंडर लेना पड़ रहा है, तो पूरे मामले की जांच की जरूरत है।

*विभागीय जांच का इंतजार*

अब सवाल संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था पर है— *क्या उपभोक्ताओं से लिए जा रहे अतिरिक्त शुल्क और कथित ओवररेटिंग की जांच होगी?* क्या यह भी जांचा जाएगा कि एजेंसी की गाड़ियों से सिलेंडर वितरण किन स्थानों पर और किस व्यवस्था के तहत किया जा रहा है?

*वर्तिका एजेंसी रीवा का पक्ष और संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।*
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बुजुर्ग के कंधे पर बैठकर नाला पार करते दिखे पटवारी, वायरल वीडियो ने खड़े किए संवेदनशीलता पर सवाल

सीधी। मध्यप्रदेश के सीधी जिले से सामने आए एक वायरल वीडियो ने सरकारी कर्मचारियों की कार्यशैली और संवेदनशीलता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में   माटा ग्राम पंचायत के पटवारी नीलेश नामदेव एक बुजुर्ग व्यक्ति के कंधे पर बैठकर नाला पार करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

बताया जा रहा है कि नाला पार करते समय पटवारी ने अपने जूते गीले होने से बचाने के लिए बुजुर्ग की मदद ली। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

अब सवाल यह है कि क्या सरकारी कर्मचारी के लिए बुजुर्ग के कंधे का सहारा लेना मजबूरी थी या सुविधा? यदि नाला पार करना इतना मुश्किल था, तो क्या प्रशासन ने मौके पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था की थी?

वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और घटना की पूरी परिस्थितियां सामने आना अभी बाकी हैं। हालांकि, वायरल तस्वीर ने सरकारी अमले की संवेदनशीलता और आम लोगों के प्रति जिम्मेदारी पर बहस जरूर छेड़ दी है।
*गांव-गांव पहुंच रही शराब की पैकारी, खुलेआम बिक रही देशी-विदेशी शराब, नशामुक्ति अभियान फेल*

*मऊगंज के BKD कंपोजिट शराब दुकान से दिनभर सप्लाई। मोटरसाइकिल और बिना नंबर की फोर व्हीलर से गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा नशा। पुलिसअधीक्षक-आबकारी मौन, युवा सबसे ज्यादा चपेट में*

*मऊगंज।* सरकार और पुलिस द्वारा नशे के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान मऊगंज में पूरी तरह फेल होते नजर आ रहा है। मऊगंज क्षेत्र में शराब कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब शराब की पैकारी खुलेआम की जा रही है। जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।

*खुलेआम हो रही सप्लाई*
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मऊगंज में संचालित BKD शराब की दुकान से दिनभर खुलेआम पैकारी हो रही है। शराब तस्कर मोटरसाइकिल और बिना नम्बर की सफेद कलर की फोर व्हीलर गाड़ियों का इस्तेमाल कर गांव-गांव तक शराब पहुंचा रहे हैं। मऊगंज  स्थित "कंपोजिट एवं देशी शराब" दुकान से ही इसकी सप्लाई की जा रही है।

सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि शराब माफिया बिना किसी डर के दिनदहाड़े पैकारी कर रहे हैं। जिसके कारण पूरा क्षेत्र नशेड़ियों और शराबियों से भरा पड़ा है।

*युवाओं में पड़ रहा सबसे ज्यादा असर*
गांव-मोहल्लों में शराब की बिक्री बढ़ने से नशेड़ियों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। खासतौर पर युवा पीढ़ी इसकी चपेट में सबसे ज्यादा आ रही है। गांवों में तीसरा व्यक्ति नशे का आदी बनता जा रहा है। 

जिन परिवारों के लोग नशे के आदी हो गए हैं उनका हाल बेहाल है। आर्थिक स्थिति खराब होने के साथ-साथ घरों में झगड़े और मारपीट की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। साथ ही नशेड़ियों के आतंक से आम लोगों का भी जीना दूभर हो गया है। शाम ढलते ही शराबियों और नशेड़ियों का दल गली-मोहल्लों में लग जाता है, जिसके कारण सभ्य समाज के लोगों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो रहा है।

*नशामुक्ति अभियान नहीं आ रहा काम*
नशे के आदी व्यक्ति द्वारा नशे के लिए आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया जाता है। क्षेत्र में ऐसी कई घटनाएं घटित भी हो चुकी हैं। लेकिन पुलिस प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा। शासन और प्रशासन का नशा मुक्ति अभियान भी नशेड़ियों को नशा मुक्त करने में नाकाम साबित हो रहा है।

नशे की सामग्री आसानी से उपलब्ध हो जाती है जिसको चखकर लोग नशा नहीं छोड़ पाते। लोगों ने पुलिस अधीक्षक  से शराब की पैकारी पर रोक लगाए जाने की मांग की है।

आबकारी और पुलिस विभाग की मिलीभगत या लापरवाही के कारण ही कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं? अब देखना होगा कि प्रशासन इस अवैध पैकारी पर कब अंकुश लगाता है?
*रीवा में गैस सिलेंडर पर ‘मनमानी’ का आरोप, ₹970 का सिलेंडर ₹1800 में!*

*वर्तिका एजेंसी रीवा पर ब्लैक में बिक्री और होम डिलीवरी के नाम पर ₹100 अतिरिक्त वसूली के आरोप, उपभोक्ता पूछ रहे—जिम्मेदारों की नजर कब पड़ेगी?*

*रीवा।* घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर रीवा में उपभोक्ताओं की जेब पर कथित तौर पर बड़ा भार पड़ने का मामला सामने आया है। आरोप है कि *₹970 के आसपास कीमत वाला घरेलू गैस सिलेंडर वर्तिका एजेंसी से कथित रूप से ब्लैक में ₹1800 तक में बेचा जा रहा है।* इतना ही नहीं, मिली जानकारी के अनुसार होम डिलीवरी के नाम पर *₹100 अतिरिक्त शुल्क* लिए जाने की भी शिकायत सामने आई है।

यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल उठता है कि निर्धारित दर से इतनी अधिक कीमत पर सिलेंडर की बिक्री कैसे हो रही है? आखिर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त रकम वसूलने की अनुमति किसने दी?

अब निगाहें संबंधित विभाग की कार्रवाई पर हैं। *क्या जिम्मेदार अधिकारी मामले की जांच कर उपभोक्ताओं से कथित अतिरिक्त वसूली का हिसाब लेंगे, या फिर सिलेंडर की इस ‘महंगी डिलीवरी’ का खेल यूं ही चलता रहेगा?*
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