Public App Logo
Jansamasya
News
पुलिस
बॉलीवुड
Bjp
National
Police
Bihar
India
रेलवे
कांग्रेस
Congress
Modi
Delhi
Viral
Dm
Rajasthan
Bollywood
दिल्ली
Patna
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
अनिल
उत्तरप्रदेश
Pmmodi
Rahulgandhi
कानपुर
Uttarpradesh
Haryana

पंचायत में हुये भ्रष्टाचार की खुली पोल मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना पर उठे सवाल,20 से 30 प्रतिशत कमीशनखोरी के आरोपों की चर्चा तेज सिंगरौली । मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना के तहत देवसर जनपद पंचायत क्षेत्र में कराए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। क्षेत्र के बेलगांव, कठदहा, बूढ़ाडाड़ सहित कई ग्राम पंचायतों में हाल ही में निर्मित पुल-पुलियाओं के पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त या धराशायी होने की चर्चाएं स्थानीय स्तर पर तेज हैं। इन घटनाओं के बाद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस शुरू हो गई है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि योजना के तहत निर्माण कार्यों की स्वीकृति में 20 से 30 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रहे निर्माण संबंधी मामलों ने लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुए होते तो पहली ही बारिश में पुल-पुलियाओं की यह स्थिति नहीं होती। सूत्रों के अनुसार इन निर्माण कार्यों में जनपद पंचायत स्तर से लेकर तकनीकी अमले तक की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। चर्चा है कि संबंधित सीईओ, सहायक यंत्री और उपयंत्री की कार्यप्रणाली को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। जांच हो तो नप सकते हैं कई अधिकारी ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। यदि जांच में निर्माण कार्यों में अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनका मानना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि निर्माण कार्य कुछ ही महीनों में खराब होने लगें तो इससे सरकारी धन की बर्बादी के साथ जनता का भरोसा भी कमजोर होता है। फिलहाल पूरे मामले में संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल निर्माण गुणवत्ता का मामला नहीं होगा, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा। वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो निष्पक्ष जांच से स्थिति स्पष्ट होना भी उतना ही आवश्यक है। ऐसे में अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई और संभावित जांच पर टिकी हैं। अब क्या देंगे जवाबॅ! इनके कार्यकाल में हुआ खेल चर्चाओं के बीच यह बात भी सामने आ रही है कि संबंधित सीईओ का कहना था कि उनके कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी उनकी है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिन पुल-पुलियाओं का निर्माण इसी कार्यकाल में हुआ और जो पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गईं, उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने में आखिर कहां चूक हुई। क्या निर्माण एजेंसियों ने निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया या फिर निगरानी व्यवस्था कमजोर रही, इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। इधर लोगों का कहना है कि निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच, गुणवत्ता परीक्षण और समय-समय पर निरीक्षण की जिम्मेदारी अधिकारियों की होती है। यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हुए तो इसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

Singrauli, Singrauli | Jul 23, 2026