दोहा:
चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह।
जिनको कछु न चाहिये वे साहन के साह ॥-रहीमदास
भावार्थ:
जब मनुष्य के मन में किसी वस्तु की चाह (इच्छा) नहीं रहती, तो चिंता भी स्वतः ही नष्ट हो जाती है और मन पूरी तरह बेपरवाह (तनावमुक्त) हो जाता है। जिनको कुछ नहीं चाहिए, वे राजाओं के भी राजा (अर्थात सबसे महान) हैं क्योंकि वे पूर्णतः तृप्त हैं। #motivation #lifelessons #motivational
Raipur, Raipur | Sep 12, 2026