
पावर परियोजनाओं में भ्रष्टाचार और तकनीकी खामियों की स्वतंत्र जांच हो: बिक्रम ठाकुर
*करोड़ों के भ्रष्टाचार और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग की ED जांच से क्यों डर रही है सरकार : बिक्रम ठाकुर*
**कहा, विमल नेगी प्रकरण में एक के बाद एक हो रहे खुलासों ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया*
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*धर्मशाला* ।। News123 ।। HPPCL के मुख्य अभियंता स्वर्गीय विमल नेगी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु का मामला अब केवल एक अधिकारी की मृत्यु का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पावर परियोजनाओं में संभावित तकनीकी खामियों, करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितताओं, साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ और पूरे जांच तंत्र पर खड़े हुए गंभीर सवालों का विषय बन चुका है।
पूर्व मंत्री बिक्रम ठाकुर ने कहा कि जिस पावर प्रोजेक्ट को प्रदेश के विकास और ऊर्जा उत्पादन का आधार बताया गया था, उसी परियोजना में आज कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। परियोजना की निर्धारित उत्पादन क्षमता के अनुरूप आज तक बिजली उत्पादन नहीं हो पाया है। इससे स्पष्ट होता है कि परियोजना की तकनीकी गुणवत्ता, निर्माण कार्य और करोड़ों रुपये के खर्च को लेकर गहन जांच की आवश्यकता है। यदि तकनीकी गलतियों और भ्रष्टाचार के कारण प्रदेश को नुकसान हुआ है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों को बेनकाब किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विमल नेगी परिवार ने न्याय की मांग करते हुए उच्च न्यायालय के समक्ष SIT की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की थी। इसके बाद सामने आए घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि जांच प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवाल सामान्य नहीं थे और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंपी गई।
बिक्रम ठाकुर ने कहा कि इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू महत्वपूर्ण पेन ड्राइव का सामने आना है। मृतक से जुड़ा महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य एक पुलिस अधिकारी के पास होना और उसके बाद संबंधित अधिकारी को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू किया जाना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। आखिर इतना महत्वपूर्ण साक्ष्य निर्धारित जांच प्रक्रिया का हिस्सा क्यों नहीं बना और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका थी, इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इससे भी बड़ा प्रश्न यह है कि उस समय SIT जांच का नेतृत्व कर रहे अधिकारी ने स्वयं नैतिक आधार पर इस मामले की जांच से स्वयं को अलग करने की बात कही थी और यह भी संकेत दिया था कि इस पूरे घटनाक्रम में केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि अन्य लोगों की भूमिका की भी गहन जांच आवश्यक है। जब स्वयं जांच से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी को इस प्रकार का कदम उठाना पड़ा तो यह स्पष्ट करता है कि मामले में गंभीर गड़बड़ियां थीं। भारतीय जनता पार्टी पहले दिन से यही कहती रही है कि विमल नेगी प्रकरण के पीछे कई ऐसे तथ्य छिपे हुए हैं जिन्हें सामने लाना आवश्यक है।
बिक्रम ठाकुर ने कहा कि आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पावर परियोजनाओं में तकनीकी खामियां, करोड़ों रुपये के संभावित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर पहलू सामने आ रहे हैं तो प्रदेश सरकार इस पूरे मामले की ED से जांच करवाने से क्यों बच रही है। यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो उसे ED जांच से डरने की कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि पावर परियोजनाओं में तकनीकी कमियों के बावजूद भुगतान किए गए, जनता के करोड़ों रुपये का दुरुपयोग हुआ और वित्तीय लेन-देन में अनियमितताएं हुई हैं तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि एक बड़ा आर्थिक अपराध हो सकता है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किन लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
बिक्रम ठाकुर की प्रमुख मांगें
1. विमल नेगी प्रकरण से जुड़े सभी वित्तीय पहलुओं, पावर परियोजनाओं में हुई संभावित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल की जांच ED से करवाई जाए।
2. पावर प्रोजेक्ट की तकनीकी खामियों, वास्तविक उत्पादन क्षमता और करोड़ों रुपये के खर्च की स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच करवाई जाए।
3. पेन ड्राइव प्रकरण सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
4. CBI जांच को पूर्ण सहयोग दिया जाए और किसी भी स्तर पर सच्चाई को सामने आने से रोका न जाए।
अंत में बिक्रम ठाकुर ने कहा कि सत्य को ज्यादा समय तक दबाया नहीं जा सकता। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि एक ईमानदार अधिकारी की मृत्यु के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं। यदि इसके पीछे भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितता और धन शोधन जैसे गंभीर अपराध जुड़े हैं तो दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। सरकार को यह बताना होगा कि आखिर ED जांच से उसे डर क्यों लग रहा है। भाजपा इस मुद्दे को जनता की आवाज बनकर अंत तक मजबूती से उठाती रहेगी।