
#भरत #तिवारी के कथित #एनकाउंटर को लेकर बिहार #पुलिस पर क्यों उठे सवाल ?...
#बिहार राज्य के #शाहपुर (#बिलौटी गांव) में पुलिस और #एसटीएफ की कार्रवाई के दौरान अपनी जान गंवाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता भारत भूषण तिवारी का मामला सिर्फ एक प्रशासनिक नाकामी नहीं, बल्कि व्यवस्था के क्रूर दोहरे मापदंड और समाज की गहरी #जातिवादी संकीर्णता #मानसिकता का जीता-जागता प्रमाण है। भारत भूषण कोई पेशेवर अपराधी नहीं थे, बल्कि एक ऐसे जागरूक और मुखर युवा थे जो जवइनिया कटाव पीड़ितों के पुनर्वास, गरीबों के हक और #प्रशासनिक #भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। उन्होंने जाति-पाति से ऊपर उठकर समाज के हर वर्ग के लिए संघर्ष किया, लेकिन आज इस दुखद घड़ी में उनके साथ खड़े होने वालों की कमी साफ खल रही है, और इसकी सबसे बड़ी कड़वी वजह उनका ब्राह्मण होना है। सोशल मीडिया और जमीन पर इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि ब्राह्मण समाज से होने के कारण इस संवेदनशील मुद्दे पर वह राजनीतिक और सामाजिक समर्थन नहीं मिल रहा है जिसके वे हकदार थे। जरा ठंडे दिमाग से कल्पना कीजिए, अगर भारत भूषण तिवारी की जगह कोई दलित या किसी तथाकथित 'वोट बैंक' वाले पिछड़े वर्ग का युवा होता, तो आज स्थिति बिल्कुल अलग होती; देश भर के बड़े-बड़े राजनेता, मानवाधिकार संगठन, कैंडल मार्च निकालने वाले बुद्धिजीवी और मुख्यधारा का मीडिया उनके दरवाजे पर डेरा डाले बैठा होता और इस घटना पर एक बड़ा राष्ट्रीय विमर्श छिड़ गया होता।
जबकि इस पूरे मामले में वास्तव में जो हुआ और जो नहीं होना चाहिए था, वह न्याय व्यवस्था का मजाक उड़ाता है। प्रशासनिक नाकामियों से तंग आकर उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना आक्रोश व्यक्त किया था, जिसके बाद पुलिस का दावा है कि उन्होंने हवा में फायरिंग की और आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी। लेकिन उनके आखिरी #फेसबुक लाइव वीडियो और परिजनों के बयानों से स्पष्ट होता है कि भारत भूषण ने पुलिस के आश्वासन पर अपना #हथियार फेंककर पूरी तरह #आत्मसमर्पण कर दिया था, जिसके बाद भी उन्हें गोलियों से भून दिया गया। बल्कि उनके पिता, जो खुद एक सेवानिवृत्त पुलिस हवलदार हैं, न्याय की भीख मांग रहे हैं। प्रशासन ने शुरू में उन्हें "#मानसिक रूप से विक्षिप्त" घोषित कर इस बर्बरता को दबाने की कोशिश की, हालांकि बाद में शाहपुर के थाना प्रभारी (#SHO) समेत तीन पुलिसकर्मियों का तत्काल निलंबन साफ जाहिर करता है, कि पुलिस की कार्रवाई में गंभीर खामियां और दुर्भावना थी। यह स्थिति देश के हर संवेदनशील नागरिक के दिल को कचोटती है, कि साल 2008 में जब मुंबई पर हमला करने वाला खूंखार पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल आमिर कसाब अत्याधुनिक हथियारों से सैकड़ों बेगुनाह लोगों पर अंधाधुंध #गोलियां बरसा रहा था, तब हमारी वीर पुलिस ने अपनी जान पर खेलकर उसे जिंदा दबोच लिया था ताकि देश का कानून अपना काम कर सके; लेकिन यहाँ अपने ही देश का एक निहत्था हो चुका युवा, जो समाज के हर तबके के लिए लड़ रहा था, उसे आधुनिक हथियारों से लैस एसटीएफ के जवान जिंदा पकड़ने की बजाय मार गिराते हैं। यह विडंबना ही है, कि जब एक ब्राह्मण युवक हर तबके के न्याय के लिए लड़ता है, तो उसकी शहादत के वक्त समाज चुप रहता है। हमें जाति के इस चश्मे को उतार फेंकना होगा और एक सुर में भारत भूषण तिवारी के लिए निष्पक्ष, उच्च स्तरीय न्यायिक जांच और उनके परिवार के लिए इंसाफ की मांग करनी होगी। #hindustankisham
Sadar, Lucknow | Jun 20, 2026