
सिरौली कलां में नगर पालिका चुनाव के बाद हुए शपथ ग्रहण समारोह ने अब एक नई सियासी चर्चा को जन्म दे दिया है।
चर्चा इस बात की है कि कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले दो प्रमुख चेहरों को शपथ ग्रहण समारोह में अपेक्षित सम्मान नहीं मिला।
बताया जा रहा है कि इनमें से एक नेता शपथ ग्रहण कार्यक्रम में पहुंचे ही नहीं, जबकि दूसरे नेता कार्यक्रम में पहुंचे, लेकिन आधे कार्यक्रम के बाद वहां से चले गए। क्योंकि मामला सिर्फ एक शपथ ग्रहण कार्यक्रम तक सीमित नहीं है।
सिरौली कलां में नगर पालिका चुनाव के नतीजों के बाद अब करीब तीन से चार महीने के भीतर विधानसभा चुनाव की तस्वीर भी सामने आने वाली है।
ऐसे में कांग्रेस के लिए यह सवाल अहम हो जाता है कि जिन स्थानीय नेताओं और प्रभावशाली चेहरों ने चुनाव में पार्टी की जीत के लिए जमीन पर मेहनत की, अगर वही चेहरे चुनाव के बाद खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं, तो इसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव में कितना पड़ सकता है?
खास तौर पर इसलिए क्योंकि दोनों ही नेता मुस्लिम समुदाय से आते हैं और अपने-अपने स्तर पर समुदाय में प्रभाव रखते हैं।
अगर विधानसभा चुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय होता है, तो मुस्लिम वोटों का रुझान और उनका संभावित ध्रुवीकरण चुनावी समीकरण को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।
हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों नेताओं की नाराज़गी कितनी गंभीर है और क्या इसका सीधा असर विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा।
लेकिन शपथ ग्रहण समारोह से सामने आए ये संकेत कांग्रेस के लिए निश्चित तौर पर राजनीतिक तौर पर नजरअंदाज करने वाले नहीं हैं।