
स्केटिंग ट्रैक किनारों पर सुरक्षा से समझौता, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उठे सवाल
भीलवाड़ा :रतन लाल आचार्य। 70वीं राज्य स्तरीय स्केटिंग प्रतियोगिता के दौरान सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आयोजन स्थल पर स्केटिंग ट्रैक के दोनों किनारों पर आवश्यक सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आई है, जिसे विशेषज्ञों ने खिलाड़ियों के लिए जोखिमपूर्ण बताया है।
जानकारों के अनुसार स्केटिंग जैसे तेज गति वाले खेल में ट्रैक के दोनों तरफ “सॉफ्ट ज़ोन” होना अनिवार्य होता है, ताकि गिरने की स्थिति में खिलाड़ियों को गंभीर चोट से बचाया जा सके। आमतौर पर इसके लिए ट्रैक के किनारों पर फोम या रबर पैडिंग, क्रैश बैरियर और उसके बाहर घास या नरम मिट्टी का क्षेत्र होना चाहिए। लेकिन प्रतियोगिता स्थल पर इस तरह की समुचित व्यवस्था का अभाव नजर आया।
खेल विशेषज्ञों का कहना है कि केवल घास होना भी पर्याप्त नहीं होता, बल्कि ट्रैक के पास किसी भी प्रकार की कठोर सतह, दीवार, खंभे या लोहे की रेलिंग नहीं होनी चाहिए। ऐसे में यदि खिलाड़ी संतुलन खोता है तो सीधे सख्त सतह से टकराने का खतरा रहता है, जिससे गंभीर चोट लग सकती है।
प्रतियोगिता जैसे बड़े आयोजन में इस तरह की लापरवाही को लेकर अभिभावकों और खेल प्रेमियों में भी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि राज्य स्तर के आयोजन में खिलाड़ियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन यहां बुनियादी सुरक्षा मानकों तक का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
आयोजक ब्रिटी स्कूल की ओर से अब तक इस मामले में कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन उठते सवालों के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है कि क्या खिलाड़ियों की सुरक्षा के साथ समझौता कर प्रतियोगिता कराना उचित है।