
तीन बार मेरिट से चूकी, ताने सहे, फिर भी नहीं मानी हार: बेरी की डिम्पल बनी बिहार पुलिस
औरंगाबाद: संघर्ष और हौसले की मिसाल बनी हैं मदनपुर प्रखंड के बेरी गांव की डिम्पल कुमारी। 2019 में पिता जगदीश प्रसाद का साया सिर से उठ गया। सात बहनों और एक भाई वाले परिवार में डिम्पल बहनों में छठे नंबर पर हैं। डिम्पल बताती हैं, "पापा मुझे बेटा की तरह मानते थे। कहते थे मेरी बेटी वर्दी पहनेगी।" पिता के जाने के बाद मां इंदु देवी ही सहारा बनीं।
घर की जिम्मेदारियों के बीच वर्दी का सपना पलता रहा। तीन बार बिहार पुलिस की परीक्षा और फिजिकल पास करने के बाद भी मेरिट में नाम नहीं आ सका। दो बार दारोगा भर्ती की पीटी परीक्षा भी पास की, लेकिन मेंस में सफलता नहीं मिली। इस दौरान आस-पड़ोस के लोग ताना मारते थे कि "बेटी बड़ी हो गई है, शादी कर दो। नौकरी के चक्कर में उम्र निकल जाएगी।" मगर मां इंदु देवी ने हर बार हौसला दिया। डिम्पल का कहना है, "मां ने ही पिता बनकर हिम्मत दी। कहती थीं कोशिश करती रहो, एक दिन वर्दी जरूर मिलेगी।"
चौथी बार की कोशिश में आखिरकार बिहार पुलिस की वर्दी हासिल कर ली। दस्तावेज सत्यापन के बाद डिम्पल को किशनगंज जिला पुलिस में तैनाती मिली है। डिम्पल अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय मां इंदु देवी को देती हैं।
डिम्पल की पढ़ाई गांव से ही शुरू हुई। प्रारंभिक शिक्षा बेरी मध्य विद्यालय से पूरी की। 2016 में बेरी हाई स्कूल से दसवीं की परीक्षा पास की। इसके बाद मदनपुर महाविद्यालय से इंटर और सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज, औरंगाबाद से ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई के साथ-साथ गांव के मैदान में ही दौड़ और फिजिकल की तैयारी जारी रखी। उसने साबित कर दिया कि बार-बार गिरकर भी उठने वाले ही मंजिल पाते हैं। डिम्पल के चयन के बाद गांव में जश्न का माहौल है। परिजनों का कहना है, "जगदीश बाबू होते तो आज सबसे ज्यादा खुश होते। उनकी बेटी ने उनका सपना पूरा कर दिया।"
डिम्पल का अगला लक्ष्य दारोगा बनकर पुलिस विभाग में सेवा करना है। उसका कहना है कि सिपाही बनना पहला पड़ाव है, मंजिल अभी बाकी है।
डिम्पल की इस सफलता पर जिला पार्षद विकास कुमार, पूर्व जिला पार्षद प्रफुल सिंह, ग्राम पंचायत बेरी के पंचायत समिति सदस्य अभिनव कुमार, सरपंच प्रतिनिधि सह रालोसपा नेता धर्मेन्द्र मेहता, शिक्षक दीपक कुमार समेत अन्य लोगों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यहां की बेटियां लगातार पुलिस और सेना में जाकर पूरे औरंगाबाद जिले का नाम रोशन कर रही हैं। डिम्पल की कहानी उन लाखों बेटियों के लिए मिसाल है जो ताने, मुश्किल हालात और बार-बार की असफलता के बाद भी अपने सपने नहीं छोड़तीं।
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