
शिक्षक व्यवस्था पर सवाल से बचने के लिए मीडिया को कठघरे में खड़ा करना समाधान नहीं
मीडिया का काम किसी शिक्षक या सरकारी स्कूल को बदनाम करना नहीं, बल्कि जो सामने आता है और जो सवाल जनता से जुड़ा है, उसे सामने रखना है। किसी विद्यालय में छात्रों की अनुशासनहीनता की घटना सामने आती है तो उसकी खबर करना पत्रकारिता का हिस्सा है, इसे पूरे शिक्षक समाज को बदनाम करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
साथ ही सरकारी स्कूलों में भवन, शौचालय, शिक्षकों की कमी, संसाधनों और शिक्षा की गुणवत्ता जैसे बुनियादी मुद्दों को भी मीडिया को लगातार उठाना चाहिए। हर आलोचना को “सरकारी स्कूलों के खिलाफ साजिश” बताकर खारिज करना भी उचित नहीं है।
मीडिया सवाल पूछेगा, संबंधित पक्ष अपना पक्ष रखेंगे और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा—यही स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद है।
सेवन तक न्यूज़ की स्पष्टता: सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी/के आधार पर प्रकाशित सामग्री का उद्देश्य किसी व्यक्ति, शिक्षक, विद्यालय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाना अथवा किसी को बदनाम करना नहीं है। हमारा उद्देश्य केवल जनहित से जुड़े विषयों को सामने रखना और संबंधित पक्ष का पक्ष रखने का अवसर देना है। किसी तथ्य की आधिकारिक पुष्टि होने पर उसे उसी के अनुसार अपडेट किया जाएगा।
Sono, Jamui | Oct 1, 2026