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स्कूली वाहनों की सघन जांच से हड़कंप, लेकिन बड़ा सवाल—क्या सिर्फ अभियान से बच्चों की सुरक्षा की गारंटी मिल जाएगी? डीएम और एसपी के निर्देश पर चला विशेष अभियान, फिटनेस से लेकर फायर एक्सटिंग्विशर तक की हुई जांच, नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी जनपद में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सोमवार को प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आया। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय एवं पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह के निर्देश पर यातायात पुलिस ने विभिन्न विद्यालयों के स्कूली वाहनों का विशेष सघन जांच अभियान चलाया। अभियान का नेतृत्व यातायात प्रभारी वीर बहादुर सिंह ने अपनी टीम के साथ किया। जांच के दौरान वाहनों में सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया गया। यातायात टीम ने वाहनों में फायर एक्सटिंग्विशर, इमरजेंसी गेट, फर्स्ट एड बॉक्स, वाहन की फिटनेस, बीमा, परमिट, प्रदूषण प्रमाण-पत्र (PUC), चालक का वैध ड्राइविंग लाइसेंस तथा निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने जैसे बिंदुओं की जांच की। अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन और वाहन संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है... हर वर्ष स्कूल खुलने पर ऐसे अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन क्या उसके बाद भी नियमित निगरानी होती है? क्या जिले के सभी स्कूली वाहनों में आज भी फायर एक्सटिंग्विशर, फर्स्ट एड बॉक्स और इमरजेंसी गेट पूरी तरह कार्यशील हैं? क्या ओवरलोडिंग करने वाले वाहनों पर रोजाना कार्रवाई होती है या सिर्फ अभियान के दिन ही जांच होती है? क्या बिना फिटनेस, बिना परमिट या बिना बीमा वाले वाहन अब भी बच्चों को ढो रहे हैं? क्या सभी स्कूल अपने ड्राइवरों का समय-समय पर मेडिकल परीक्षण और पुलिस सत्यापन कराते हैं? क्या परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से हर महीने निरीक्षण करेंगे? अगर किसी वाहन में गंभीर खामी मिलने के बाद भी वह अगले दिन फिर सड़क पर उतर जाए, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? हर हादसे के बाद जागता है सिस्टम? देश और प्रदेश में कई बार स्कूली वाहनों से जुड़े दर्दनाक हादसे सामने आ चुके हैं। हर घटना के बाद जांच अभियान तेज होता है, लेकिन कुछ समय बाद व्यवस्था फिर पहले जैसी दिखाई देने लगती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सुरक्षा केवल अभियान तक सीमित रहेगी या इसे स्थायी व्यवस्था बनाया जाएगा? यातायात प्रभारी वीर बहादुर सिंह ने कहा कि स्कूली बच्चों की सुरक्षित यात्रा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनपद में समय-समय पर ऐसे अभियान चलते रहेंगे और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब आपकी बारी... क्या आपको लगता है कि स्कूली वाहनों की जांच हर सप्ताह होनी चाहिए? क्या नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर भी आर्थिक दंड और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए? क्या आपके क्षेत्र में स्कूली वाहन सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। #जालौन #उरई #स्कूल_बस #स्कूली_वाहन #बच्चों_की_सुरक्षा #रोड_सेफ्टी #यातायात_पुलिस #UPPolice #जिलाधिकारी #पुलिस_अधीक्षक #वीरबहादुरसिंह #MotorVehicleAct #SchoolSafety #SchoolBus #StudentSafety #TrafficPolice #RoadSafety #FirstAid #FireSafety #VehicleFitness #PUC #BreakingNews #LatestNews #JalaunNews #UraiNews #UPNews #SafeTransport #Education #PublicSafety #जनहित

Jalaun, Jalaun | Jul 13, 2026

MORE NEWS

चुम्मी कांड में निलंबित हो गये प्राइमरी स्कूल के मास्टर और मास्टराइन

कन्नौज - सरकारी प्राथमिक विद्यालय में तैनात एक शिक्षक और शिक्षिका का आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने दोनों को निलंबित कर दिया है। हालांकि वायरल वीडियो कई माह पुराना है, लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की। मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है।

चुम्मी कांड में निलंबित हो गये प्राइमरी स्कूल के मास्टर और मास्टराइन कन्नौज - सरकारी प्राथमिक विद्यालय में तैनात एक शिक्षक और शिक्षिका का आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने दोनों को निलंबित कर दिया है। हालांकि वायरल वीडियो कई माह पुराना है, लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की। मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है।

Jalaun, Jalaun | Jul 15, 2026

घर में जबरन घुसी पुलिस, की तोड़फोड़ और दबाव में कराया समझौता?
 पीड़ित ने कैमरे के सामने लगाए गंभीर आरोप, वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप जालौन पुलिस Jalaun Police District Magistrate/District Election Officer, Jalaun DM Jalaun 

जालौन के जगम्मनपुर में संपत्ति विवाद ने पकड़ा तूल, पीड़ित ने एसपी, डीआईजी, डीजीपी और डीएम से की निष्पक्ष जांच की मांग; 
सीसीटीवी, जीडी और पुलिस रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की उठाई मांग।

रामपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम जगम्मनपुर में संपत्ति विवाद को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
 गांव निवासी राजकुमार पुत्र स्व. बैजनाथ एवं शिवशंकर पुत्र स्व. बैजनाथ ने पुलिस अधीक्षक जालौन को पांच पृष्ठों का शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि जगम्मनपुर पुलिस चौकी के प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों ने न्यायालय में विचाराधीन संपत्ति विवाद में हस्तक्षेप किया, उनके घर में जबरन प्रवेश किया, तोड़फोड़ की और परिवार को पुलिस के दबाव में थाने ले जाकर कथित समझौता कराने का प्रयास किया।
 शिकायत की प्रतिलिपि डीआईजी झांसी, डीजीपी उत्तर प्रदेश और जिलाधिकारी जालौन को भी भेजी गई है।

पीड़ितों का कहना है कि विवादित संपत्ति का मामला माधौगढ़ न्यायालय में पहले से विचाराधीन है और इस संबंध में वाद संख्या 23/2025 लंबित है। 
इसके बावजूद कथित रूप से पुलिस ने एक पक्ष को लाभ पहुंचाने की नीयत से कार्रवाई की। 
शिकायत में कहा गया है कि 6 जून 2026 को विवादित संपत्ति का कथित विक्रय किया गया, जिसके बाद कब्जा दिलाने की कोशिशें शुरू हो गईं। इस संबंध में पुलिस को पहले ही लिखित शिकायत देकर न्यायालय में मामला लंबित होने की जानकारी दी जा चुकी थी।

पीड़ितों का आरोप है कि 11 जुलाई 2026 को उन्होंने उच्च अधिकारियों को ऑनलाइन शिकायत भेजकर आशंका जताई थी कि पुलिस की मदद से जबरन कब्जा कराया जा सकता है। 
आरोप है कि उसी दिन शाम को पुलिस उनके घर पहुंची, जबरन अंदर घुस गई, तोड़फोड़ की और परिवार के सदस्यों को रामपुरा थाने ले गई। 
वहां पहले से मौजूद सूर्यकांत मिश्रा की उपस्थिति में कथित रूप से एक हस्तलिखित समझौता पत्र तैयार कराया गया और उस पर हस्ताक्षर कराने के लिए दबाव बनाया गया।

पीड़ितों का कहना है कि यह समझौता उनकी स्वतंत्र इच्छा से नहीं बल्कि कथित पुलिस दबाव में कराया गया। 
उनका यह भी दावा है कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो मौजूद है, जिसमें उन्होंने कैमरे के सामने अपनी आपबीती बताई है।
 वीडियो में पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

शिकायत में मांग की गई है कि 11 जुलाई की सीसीटीवी फुटेज, जनरल डायरी (GD), आगमन-रवानगी रजिस्टर, ड्यूटी रजिस्टर, पुलिस वाहन की लॉगबुक, कॉल डिटेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएं, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। 
साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित चौकी प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों को इस प्रकरण से अलग रखने तथा आरोप सही पाए जाने पर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी की गई है।

घटना के बाद उठ रहे बड़े सवाल

जब संपत्ति विवाद न्यायालय में विचाराधीन था तो पुलिस की भूमिका क्या थी?

क्या बिना किसी वैधानिक नोटिस या एफआईआर के घर में प्रवेश किया गया?

क्या परिवार को कानूनी प्रक्रिया के तहत थाने लाया गया था?

यदि कार्रवाई पूरी तरह वैधानिक थी तो उसकी जीडी, नोटिस और रिकॉर्ड क्या कहते हैं?

क्या सीसीटीवी फुटेज पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाएगी?

क्या पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय किसी निजी विवाद में हस्तक्षेप किया?

क्या उच्च अधिकारी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे?

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय की उम्मीद है और वे चाहते हैं कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाए।

पीड़ित ने कैमरे के सामने पूरी घटना बताई है।  खबर में आगे की प्रशासन का अपडेट का इंतजार रहेगा 

वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

घर में जबरन घुसी पुलिस, की तोड़फोड़ और दबाव में कराया समझौता? पीड़ित ने कैमरे के सामने लगाए गंभीर आरोप, वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप जालौन पुलिस Jalaun Police District Magistrate/District Election Officer, Jalaun DM Jalaun जालौन के जगम्मनपुर में संपत्ति विवाद ने पकड़ा तूल, पीड़ित ने एसपी, डीआईजी, डीजीपी और डीएम से की निष्पक्ष जांच की मांग; सीसीटीवी, जीडी और पुलिस रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की उठाई मांग। रामपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम जगम्मनपुर में संपत्ति विवाद को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गांव निवासी राजकुमार पुत्र स्व. बैजनाथ एवं शिवशंकर पुत्र स्व. बैजनाथ ने पुलिस अधीक्षक जालौन को पांच पृष्ठों का शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि जगम्मनपुर पुलिस चौकी के प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों ने न्यायालय में विचाराधीन संपत्ति विवाद में हस्तक्षेप किया, उनके घर में जबरन प्रवेश किया, तोड़फोड़ की और परिवार को पुलिस के दबाव में थाने ले जाकर कथित समझौता कराने का प्रयास किया। शिकायत की प्रतिलिपि डीआईजी झांसी, डीजीपी उत्तर प्रदेश और जिलाधिकारी जालौन को भी भेजी गई है। पीड़ितों का कहना है कि विवादित संपत्ति का मामला माधौगढ़ न्यायालय में पहले से विचाराधीन है और इस संबंध में वाद संख्या 23/2025 लंबित है। इसके बावजूद कथित रूप से पुलिस ने एक पक्ष को लाभ पहुंचाने की नीयत से कार्रवाई की। शिकायत में कहा गया है कि 6 जून 2026 को विवादित संपत्ति का कथित विक्रय किया गया, जिसके बाद कब्जा दिलाने की कोशिशें शुरू हो गईं। इस संबंध में पुलिस को पहले ही लिखित शिकायत देकर न्यायालय में मामला लंबित होने की जानकारी दी जा चुकी थी। पीड़ितों का आरोप है कि 11 जुलाई 2026 को उन्होंने उच्च अधिकारियों को ऑनलाइन शिकायत भेजकर आशंका जताई थी कि पुलिस की मदद से जबरन कब्जा कराया जा सकता है। आरोप है कि उसी दिन शाम को पुलिस उनके घर पहुंची, जबरन अंदर घुस गई, तोड़फोड़ की और परिवार के सदस्यों को रामपुरा थाने ले गई। वहां पहले से मौजूद सूर्यकांत मिश्रा की उपस्थिति में कथित रूप से एक हस्तलिखित समझौता पत्र तैयार कराया गया और उस पर हस्ताक्षर कराने के लिए दबाव बनाया गया। पीड़ितों का कहना है कि यह समझौता उनकी स्वतंत्र इच्छा से नहीं बल्कि कथित पुलिस दबाव में कराया गया। उनका यह भी दावा है कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो मौजूद है, जिसमें उन्होंने कैमरे के सामने अपनी आपबीती बताई है। वीडियो में पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। शिकायत में मांग की गई है कि 11 जुलाई की सीसीटीवी फुटेज, जनरल डायरी (GD), आगमन-रवानगी रजिस्टर, ड्यूटी रजिस्टर, पुलिस वाहन की लॉगबुक, कॉल डिटेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएं, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित चौकी प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों को इस प्रकरण से अलग रखने तथा आरोप सही पाए जाने पर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी की गई है। घटना के बाद उठ रहे बड़े सवाल जब संपत्ति विवाद न्यायालय में विचाराधीन था तो पुलिस की भूमिका क्या थी? क्या बिना किसी वैधानिक नोटिस या एफआईआर के घर में प्रवेश किया गया? क्या परिवार को कानूनी प्रक्रिया के तहत थाने लाया गया था? यदि कार्रवाई पूरी तरह वैधानिक थी तो उसकी जीडी, नोटिस और रिकॉर्ड क्या कहते हैं? क्या सीसीटीवी फुटेज पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाएगी? क्या पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय किसी निजी विवाद में हस्तक्षेप किया? क्या उच्च अधिकारी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे? पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय की उम्मीद है और वे चाहते हैं कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाए। पीड़ित ने कैमरे के सामने पूरी घटना बताई है। खबर में आगे की प्रशासन का अपडेट का इंतजार रहेगा वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

Jalaun, Jalaun | Jul 15, 2026

उरई में चला अतिक्रमण हटाओ अभियान, जिला परिषद चौराहे से मामू-भांजे मजार तक हटाए गए अवैध कब्जे

उरई में प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त अभियान शुरू किया। सिटी मजिस्ट्रेट के निर्देशन में नगर पालिका परिषद की टीम ने जिला परिषद चौराहे से लेकर मामू-भांजे मजार तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।

अभियान के दौरान सड़क किनारे किए गए अवैध कब्जों को हटाया गया। वहीं नगर पालिका परिषद द्वारा क्षेत्र में नाला निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है, जिससे जल निकासी की व्यवस्था बेहतर हो सके और लोगों को आवागमन में सुविधा मिले।

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि दोबारा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

उरई में चला अतिक्रमण हटाओ अभियान, जिला परिषद चौराहे से मामू-भांजे मजार तक हटाए गए अवैध कब्जे उरई में प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त अभियान शुरू किया। सिटी मजिस्ट्रेट के निर्देशन में नगर पालिका परिषद की टीम ने जिला परिषद चौराहे से लेकर मामू-भांजे मजार तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। अभियान के दौरान सड़क किनारे किए गए अवैध कब्जों को हटाया गया। वहीं नगर पालिका परिषद द्वारा क्षेत्र में नाला निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है, जिससे जल निकासी की व्यवस्था बेहतर हो सके और लोगों को आवागमन में सुविधा मिले। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि दोबारा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

Jalaun, Jalaun | Jul 14, 2026

बंगरा कस्तूरबा विद्यालय की छात्राओं ने एसडीएम से लगाई न्याय की गुहार

उपजिलाधिकारी माधौगढ़ ने जताई नाराजगी, जांच कर कार्रवाई के दिए सख्त निर्देश

माधौगढ़ (जालौन)। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, बंगरा की छात्राएं अपने अभिभावकों के साथ विद्यालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं की शिकायत लेकर उपजिलाधिकारी माधौगढ़ कार्यालय पहुंचीं। छात्राओं ने पेयजल, साफ-सफाई, छात्रावास, भोजन, सुरक्षा सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव की शिकायत करते हुए प्रार्थना पत्र सौंपा।
शिकायत सुनने के बाद उप जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि विद्यालय समय में छात्राओं को अभिभावकों के साथ कार्यालय तक कैसे आने दिया गया और उनके साथ विद्यालय का कोई जिम्मेदार अधिकारी क्यों नहीं था। उपजिलाधिकारी माधौगढ़ ने कहा कि यदि रास्ते में किसी छात्रा के साथ कोई अप्रिय घटना हो जाती, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती? उन्होंने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए स्पष्ट किया कि विद्यालयों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बंगरा कस्तूरबा विद्यालय की छात्राओं ने एसडीएम से लगाई न्याय की गुहार उपजिलाधिकारी माधौगढ़ ने जताई नाराजगी, जांच कर कार्रवाई के दिए सख्त निर्देश माधौगढ़ (जालौन)। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, बंगरा की छात्राएं अपने अभिभावकों के साथ विद्यालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं की शिकायत लेकर उपजिलाधिकारी माधौगढ़ कार्यालय पहुंचीं। छात्राओं ने पेयजल, साफ-सफाई, छात्रावास, भोजन, सुरक्षा सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव की शिकायत करते हुए प्रार्थना पत्र सौंपा। शिकायत सुनने के बाद उप जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि विद्यालय समय में छात्राओं को अभिभावकों के साथ कार्यालय तक कैसे आने दिया गया और उनके साथ विद्यालय का कोई जिम्मेदार अधिकारी क्यों नहीं था। उपजिलाधिकारी माधौगढ़ ने कहा कि यदि रास्ते में किसी छात्रा के साथ कोई अप्रिय घटना हो जाती, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती? उन्होंने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए स्पष्ट किया कि विद्यालयों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

Jalaun, Jalaun | Jul 14, 2026

बालिग युवती ने अपनी मर्जी से विवाह करने की घोषणा, किसी दबाव से किया इनकार

➡️ जनपद जालौन के ग्राम खैरी, थाना कैलिया निवासी सलौनी पुत्री अरविन्द्र कुमार ने लिखित घोषणा जारी कर कहा है कि वह अपनी पूर्ण इच्छा एवं स्वेच्छा से कोंच के गांधी नगर निवासी सनोज कुशवाहा पुत्र श्याम बिहारी के साथ विवाह कर रही हैं।

➡️ लिखित घोषणा में सलौनी ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि इस विवाह के लिए उन पर किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन या जबरदस्ती नहीं की गई है तथा यह निर्णय उन्होंने अपनी स्वतंत्र इच्छा और पूर्ण समझ-बूझ से लिया है।

➡️ घोषणा में यह भी कहा गया है कि दोनों बालिग हैं और आपसी सहमति से विवाह का निर्णय लिया है।

➡️ यह जानकारी संबंधित पक्ष द्वारा जारी स्वैच्छिक घोषणा के आधार पर है। यदि मामले में भविष्य में कोई कानूनी या प्रशासनिक जानकारी सामने आती है, तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।

बालिग युवती ने अपनी मर्जी से विवाह करने की घोषणा, किसी दबाव से किया इनकार ➡️ जनपद जालौन के ग्राम खैरी, थाना कैलिया निवासी सलौनी पुत्री अरविन्द्र कुमार ने लिखित घोषणा जारी कर कहा है कि वह अपनी पूर्ण इच्छा एवं स्वेच्छा से कोंच के गांधी नगर निवासी सनोज कुशवाहा पुत्र श्याम बिहारी के साथ विवाह कर रही हैं। ➡️ लिखित घोषणा में सलौनी ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि इस विवाह के लिए उन पर किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन या जबरदस्ती नहीं की गई है तथा यह निर्णय उन्होंने अपनी स्वतंत्र इच्छा और पूर्ण समझ-बूझ से लिया है। ➡️ घोषणा में यह भी कहा गया है कि दोनों बालिग हैं और आपसी सहमति से विवाह का निर्णय लिया है। ➡️ यह जानकारी संबंधित पक्ष द्वारा जारी स्वैच्छिक घोषणा के आधार पर है। यदि मामले में भविष्य में कोई कानूनी या प्रशासनिक जानकारी सामने आती है, तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।

Jalaun, Jalaun | Jul 14, 2026