
#राठ-उरई मार्ग: ₹1.54 करोड़ खर्च, सात महीने में चौथी बार पुल की स्लैब क्षतिग्रस्त होने का दावा
चिकासी-मोहाना पुल की मरम्मत पर उठे सवाल, कई जगह सरिया बाहर निकलने से वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर चिंता
राठ (हमीरपुर)। बेतवा नदी पर बने चिकासी-मोहाना पुल की मरम्मत के बाद भी इसकी हालत को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मार्च में ₹1.54 करोड़ की लागत से मरम्मत कराई गई थी, लेकिन सात माह के भीतर चौथी बार स्लैब क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई है। कई जगह सरिया बाहर निकलने की भी जानकारी है। विभाग की ओर से दोबारा मरम्मत का काम कराया जा रहा है।
वर्ष 1983 में बना 699 मीटर लंबा यह पुल हमीरपुर और जालौन जनपद को जोड़ता है। इससे प्रतिदिन करीब 2,500 वाहनों के गुजरने का अनुमान है। राठ-उरई मार्ग पर स्थित होने के कारण यह पुल आसपास के गांवों के साथ महोबा, झांसी, कानपुर, इटावा और दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
पुल की मरम्मत के लिए 5 फरवरी से 16 मार्च तक आवागमन बंद रखा गया था। इस दौरान क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत, एक्सपेंशन ज्वाइंट बदलने और सतह को मजबूत करने का काम कराया गया। करीब 40 दिन तक यातायात बंद रहने से आसपास के गांवों के लोगों को परेशानी हुई थी। 17 मार्च को आवागमन बहाल होने के कुछ समय बाद ही स्लैब क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें सामने आने लगी थीं।
मरम्मत की गुणवत्ता पर सवाल
बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ने से काम में इस्तेमाल सामग्री, तकनीकी मानकों और निगरानी व्यवस्था की जांच की मांग उठ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार मरम्मत कराने के बजाय पुल की समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
विभाग का क्या कहना है?
लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन दृगपाल वर्मा ने कहा कि स्लैब उखड़ी नहीं है। पुल की मजबूती बनाए रखने के लिए मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है।
अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी पुल की सतह को लेकर बार-बार शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं? इसकी तकनीकी जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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Rath, Hamirpur | Oct 19, 2026