
राष्ट्रव्यापी आह्वान पर भिवानी में गरजा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन
एक षडय़ंत्र के तहत ओबीसी के साथ धोखेबाजी कर रही है सरकार : दीपक जांगड़ा
ओबीसी के हक पर डाका बर्दाश्त नहीं, हक नहीं मिला तो उखाड़ फेंकेंगे सरकार : दीपक जांगड़ा
भिवानी, 22 जून : राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को पूरे देश सहित भिवानी जिला मुख्यालय पर ओबीसी समाज का गुस्सा ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा। जनगणना के पहले चरण में ओबीसी के आंकड़े अलग से दर्ज ना करने के विरोध में पूर्व घोषित चरणबद्ध आंदोलन के तहत शुक्रवार को भिवानी में एक रोषपूर्ण रैली और ज़ोरदार प्रदर्शन किया गया। इस दौरान भारी तादात में एकत्रित हुए पिछड़ा वर्ग के कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने सरकार की ओबीसी विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए लघु सचिवालय पहुंचे तथा राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया।
इस मौके पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला संयोजक दीपक जांगड़ा ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए बेहद कड़े और रोषात्मक लहजे में सरकार और प्रशासनिक तंत्र पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन इस बात का गवाह है कि अब पिछड़ा वर्ग सो नहीं रहा है, बल्कि अपने अधिकारों के लिए जाग चुका है। सरकार जनगणना के प्रथम चरण में हाउस लिस्टिंग की प्रक्रिया के दौरान पारिवारिक कैटेगरी की जानकारी तो ले रही है, लेकिन जानबूझकर उसमें केवल तीन ही पर्याय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य दिए गए है। इसमें ओबीसी का कोई अलग विकल्प ही नहीं रखा गया है। इससे साफ स्पष्ट होता है कि सरकार आगामी राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी की जातिगत गणना करने से भाग रही है और यह सीधे तौर पर देश की बहुसंख्यक आबादी के साथ एक सोची-समझी बड़ी धोखेबाजी है।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश संयोजक गणेशीलाल वर्मा ने कहा कि यह सब एक खास विचारधारा और प्लानिंग के तहत किया जा रहा है ताकि पिछड़े वर्ग की वास्तविक ताकत और संख्या को छुपाया जा सके। हमारी साफ मांग है कि जनगणना फॉर्म और डिजिटल ऐप में तत्काल ओबीसी का अलग से विकल्प जोड़ा जाए, ताकि पिछड़ा वर्ग के साथ न्याय हो सके। अगर हमारी संख्या के अनुसार हमें हक नहीं मिला, तो यह समाज इस गूंगी-बहरी सरकार को उखाड़ फेंकने का माद्दा रखता है। उन्होंने कहा कि इस जनगणना के लिए एचएलओ नाम का मोबाइल ऐप तैयार किया गया है, जिसमें सारा डेटा केवल डिजिटल रूप में दर्ज हो रहा है और इसका कोई भौतिक रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा है।
मोर्चा ने आरोप लगाया कि इस डेटा को सुरक्षित या सही तरीके से रिकॉर्ड करने की किसी भी अधिकारी की कानूनी जिम्मेदारी तय नहीं की गई है, जिससे आंकड़ों में हेरफेर की पूरी गुंजाइश है और इसके परिणामों की विश्वसनीयता पूरी तरह संदेहास्पद है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि इस डिजिटल खेल को बंद कर जनगणना के आंकड़ों के भौतिक सत्यापन की एक पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांग पत्र पर तुरंत संज्ञान लेकर ओबीसी का कॉलम नहीं जोड़ा गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन देशव्यापी चक्का जाम और अनिश्चितकालीन धरने में बदल जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। इस अवसर पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा जिला संयोजक राजीव सैनी, हवा सिंह सांगा, साहिल, जयवीर सांगा, भाारतीय विद्यार्थी मोर्चा जिला संयोजक दीपांशु सांगा, भारत मुक्ति मोर्चा जिला संयोजक रोहताश दहिया, मनोज उमरावत, बीवीएफ जिला संयोजक रामपाल नेहरा, भारत मुक्ति मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष रमेश दहिया सहित अनेक लोग मौजूद रहे।