
☀️धनतेरस का धन☀️
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☀️अन्न धन
☀️गौ धन
✅ये प्रजा का धन है,समाज का धन है।
☀️गज धन
☀️बाज धन
✅ये राजा का धन है।
प्राचीन ज्ञान में ये चार ही धन बताए गए थे।
सोना चांदी कौड़ी और रुपया
ये धन नही बल्कि वास्तविक धन(अन्न) प्राप्त करने के साधन है।
हां जी धन नही साधन है मात्र सा+धन
जिसके पास भी ये दो धन (अन्न धन और गौ धन) होगा
वह कभी भूखा नहीं मर सकता
वह कभी कुपोषित नहीं होगा
कितना ही लॉक डाउन लग जाए
उसके खेत से अनाज तो पैदा होगा ही
कितना ही अकाल पड़ जाए
गाय के दूध दही से से वह पल ही जाएगा।
इन दोनों ही धन में ग्लूकोश रूपी अमृत होता है,
अन्न का ग्लूकोश
दूध का ग्लूकोश
हमारे लिए अमृत ही है,
क्योंकि इनसे ही हमारा शरीर बनता है,चलता है।
जिस अमृत को प्राप्त कर सभी देव अमर हुए
चन्द्रमा वनस्पतियों का देवता है,
अमृत की शक्ति से ही चंद्रमा वनस्पतियों को जीवनी शक्ति देता है।
चन्द्रमा की शीतल किरणों से ही समस्त धरती का जल वर्षा के बाद शुद्ध हो जाता है।
यह अमृत की शक्ति है
इसी अमृत को प्राप्त करने का ज्ञान
आयुर्वेद है।
इस ज्ञान को देने वाले भगवान धन्वंतरी का आज प्राकट्य दिवस। है।
इन्होंने आज ही समुद्र मंथन से प्रकट होकर अमृत रूपी रसायन देवताओं को दिया है।
इसी लिए उनके याद में हम आज धनतेरस का पर्व मनाते है
आज की चंद्रमा की रोशनी के बाद हर औषधि में यह रसायन पूर्ण हो जाता है।
वर्षा ऋतु के बाद खेती की फसलों को काटकर हम अपने घरों में लाते है,
अन्न गाह कर उसे अपने भंडार में रखते है,
उस अन्न में रसायनों की मात्रा बढ़े
उनमें अमृत रूपी रसायन आए इस कामना से पूरे उमंग और उत्साह के साथ भगवान धन्वंतरि से प्रार्थना करके हम धनतेरस का पर्व मनाते है।
इस नव अन्न धन को गाय को पहले खिलाते है
और
फिर गाय के जूठे अन्न को हम खाकर अपने स्वास्थ्य की कामना करते है।
आज सभी तरह अन्न और औषधियों
जैसे
अपामार्ग
छुई मुई
अश्व गंधा
आदि की पूजा की जाती है
और फिर
दीपावली की रात्रि में इन अन्न और औषधियों दीपक को रोशनी दिखाकर दूसरे दिन प्रात: इनके जड़ों को निकालकर धुलकर अन्न के साथ मिलकर बिना नमक डालें पकाकर गायों को खिलाया जाता है
और गाय से थोड़ा जूठन बचाकर खुद खाया जाता है।
दुनिया में सबसे महंगा पदार्थ लार को कहा गया है
जब गाय इन पके अन्न औषधि को खाती है तो अपनी लार उसमे छोड़ती ही है
इस तरह से अन्न औषधि के अमृत और गाय की मुंह से निकली लार को खाकर वस्तुत: हम वर्ष भर निरोगी रहे
यही धनतेरस है।
कुछ परिवार कद्दू की सब्जी या सुरन की सब्जी भी दीपावली के दिन खाते है,इनका भी एक विशिष्ट महत्व है।
हर अन्न और औषधि
अपना सब कुछ बलिदान करके हम हमे पोषण देती है।
(औषधि जड़ से उखड़कर और अन्न के अंदर का बीज का जीवन समाप्त होकर हमारा भोजन बनता है)
गाय भी अपने भोजन का पूरा सार दूध,दही,घी,और छाछ जैसे अमृत रूपी रसायन के रूप में हमे प्रदान करती है
अस्तु
अन्न ही धन है
गौ ही धन है
इन दोनो धन को अपनाए
दिए जलाएं धनतेरस मनाएं
🙏
मिताली-ताराचंद बेलजी की ओर से आप सभी को
धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं