एवरेस्ट बेस कैंप पर बढ़ती मानवीय गतिविधियों का असर अब खुम्बू ग्लेशियर पर भी चिंता बढ़ा रहा है। एक नए अध्ययन के मुताबिक, पर्वतारोही और गाइड रोजाना 6,000 लीटर से ज्यादा मूत्र पैदा करते हैं। इसके तापीय प्रभाव से एक पर्वतारोहण सीजन में करीब 154 टन बर्फ पिघलने के बराबर ऊर्जा का अनुमान लगाया गया है।
हालांकि, 154 टन वास्तविक रूप से पिघली बर्फ का मापा गया आंकड़ा नहीं, बल्कि ऊष्मा के आधार पर लगाया गया अनुमान है। वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्लेशियरों के पिघलने का सबसे बड़ा कारण अभी भी जलवायु परिवर्तन है।
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