
हिमालय में उत्तराखंड का नया कीर्तिमान! 6106 मीटर ऊंचे अज्ञात कोल का प्रथम आरोहण, जीतेंद्र दानू की टीम ने दिया ‘टिंफू कोल’ नाम
टिंफू ग्लेशियर क्षेत्र में रचा इतिहास, आरोहण के बाद दल ने दिया ‘टिंफू कोल’ नाम; नंदा देवी और सुनंदा देवी की चोटियों का दिखा विहंगम दृश्य
बागेश्वर। उत्तराखंड के पर्वतारोही जीतेंद्र सिंह दानू और उनकी टीम ने हिमालय में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मल्ला दानपुर के वाछम गांव निवासी जीतेंद्र दानू के नेतृत्व में चार सदस्यीय दल ने टिंफू ग्लेशियर क्षेत्र में 6106 मीटर ऊंचे एक अज्ञात कोल का प्रथम आरोहण किया। सफल आरोहण के बाद दल ने इस नए आरोहित कोल को ‘टिंफू कोल’ नाम दिया।
यह उपलब्धि 21 सितंबर की सुबह 8:45 बजे हासिल की गई। टीम के अनुसार, कठिन हिमालयी परिस्थितियों, बर्फीले मार्ग और चुनौतीपूर्ण भूभाग के बीच रास्ता तलाशते हुए दल ने इस ऊंचाई तक पहुंच बनाई।
चार सदस्यीय दल ने रचा नया अध्याय
इस साहसिक अभियान का नेतृत्व जीतेंद्र सिंह दानू ने किया। उनके साथ डिप्टी लीडर सत्य नारायण बाग, समिटियर प्रवीण सिंह दानू और सदस्य वीरेंद्र सिंह दानू अभियान में शामिल रहे।
ओडिशा निवासी सत्य नारायण बाग के साथ उत्तराखंड के झूनी गांव के प्रवीण सिंह दानू और वीरेंद्र सिंह दानू ने भी इस चुनौतीपूर्ण अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अभियान 16 सितंबर को शुरू हुआ और 23 सितंबर को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
जहां एक सदी पहले शुरू हुआ था अन्वेषण, वहीं बना नया इतिहास
टिंफू ग्लेशियर क्षेत्र का पर्वतारोहण और हिमालयी अन्वेषण के इतिहास में विशेष महत्व रहा है। वर्ष 1926 में ह्यू रटलज, आरसी विल्सन और टीएच सोमरवेल ने इस क्षेत्र का अन्वेषण किया था। उस समय उनका उद्देश्य नंदा देवी इनर सैंक्चुअरी तक पहुंचने के संभावित मार्ग की तलाश करना था।
करीब एक सदी बाद इसी क्षेत्र में एक अज्ञात कोल का प्रथम आरोहण पर्वतारोहण के लिहाज से महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है।
6106 मीटर की ऊंचाई से दिखा हिमालय का अद्भुत नजारा
टीम के अनुसार, ‘टिंफू कोल’ से मां नंदा देवी, मां सुनंदा देवी, उत्तरी नंदा देवी ग्लेशियर और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की कई ऊंची हिमालयी चोटियों का शानदार दृश्य दिखाई देता है।
जीतेंद्र सिंह दानू ने इस उपलब्धि को मां नंदा और मां सुनंदा के आशीर्वाद, पूरी टीम के सामूहिक प्रयास और कठिन हिमालयी परिस्थितियों में किए गए साहसिक अभियान का परिणाम बताया।
उन्होंने कहा कि टिंफू ग्लेशियर क्षेत्र ऐतिहासिक और पर्वतारोहण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और नए कोल का प्रथम आरोहण उत्तराखंड के हिमालयी पर्वतारोहण इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है।
पहले भी मिल चुका है ‘दानपुर रत्न सम्मान’
पर्वतारोहण के क्षेत्र में योगदान और उपलब्धियों के लिए वाछम निवासी जीतेंद्र दानू को इससे पहले ‘दानपुर रत्न सम्मान-2025’ से भी सम्मानित किया जा चुका है।
‘टिंफू कोल’ के प्रथम आरोहण की खबर सामने आने के बाद मल्ला दानपुर क्षेत्र में खुशी की लहर है। क्षेत्रवासियों ने जीतेंद्र दानू और उनकी पूरी टीम को बधाई दी है।
यह उपलब्धि न सिर्फ उत्तराखंड के पर्वतारोहण इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है, बल्कि मल्ला दानपुर और पहाड़ के युवाओं के लिए साहसिक पर्वतारोहण के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी बनकर सामने आई है।
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