आगामी खरीफ मौसम में हरी खाद (ढैंचा-मूंग) अपनाएं, मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन बढ़ाएं।
कृषि विभाग ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की है। हरी खाद के प्रयोग से मिट्टी की संरचना में सुधार होता है, जलधारण क्षमता बढ़ती है, लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या में वृद्धि होती है तथा फसल उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है।
जिले की सहकारी समितियों में ढैंचा एवं मूंग बीज उपलब्ध हैं, जिन पर 50% अनुदान प्रदान किया जा रहा है। हरी खाद अपनाकर टिकाऊ खेती, स्वस्थ मिट्टी और बेहतर उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाएं।
स्वस्थ मिट्टी • बेहतर उत्पादन • समृद्ध किसान
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