
न जाति, न धर्म, सिर्फ मानवता | SA News Chhattisgarh
रायपुर | 19-10-2026: सच्ची भक्ति की पहचान संकट में की गई निस्वार्थ सेवा से होती है। इसका जीवंत उदाहरण रायपुर के मोवा स्थित श्री बालाजी हॉस्पिटल में देखने को मिला, जहां खरोरा अंतर्गत ग्राम मधईपुर निवासी फिरंता दास जी गंभीर स्थिति में भर्ती हैं। चिकित्सकों के अनुसार उपचार के दौरान मरीज की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई थी और आपातकालीन रूप से 2 यूनिट O+ रक्त की सख्त आवश्यकता थी। परिवार के लिए यह समय किसी बड़े संकट से कम नहीं था, क्योंकि समय पर रक्त न मिलने पर जान पर खतरा मंडरा रहा था।
रक्त की इस आपात सूचना मिलते ही जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के दो अनुयायी भक्त हरिश्चंद्र दास जी एवं भक्त माधव दास जी (रायपुर) ने मानवता का असली धर्म निभाया। बिना एक क्षण गंवाए दोनों सेवादार तुरंत श्री बालाजी हॉस्पिटल पहुंचे और 1-1 यूनिट रक्तदान कर 2 यूनिट की आवश्यकता को पूरा किया। उनके इस समय पर किए गए रक्तदान से मरीज के जीवन की रक्षा संभव हो सकी। रक्तदान के बाद सेवादारों ने बताया कि उन्हें यह निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा अपने पूज्य गुरुदेव संत रामपाल जी महाराज जी की पावन शिक्षाओं से मिलती है।
संत रामपाल जी महाराज जी अपने अनुयायियों को सदा यही सिखाते हैं -
"जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।"
संत जी के अनुयायी न केवल आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचार करते हैं, बल्कि देहदान, रक्तदान, अन्नपूर्णा मुहिम, बाढ़-पीड़ितों की सहायता जैसे सामाजिक कार्यों में सदैव अग्रणी रहते हैं। यह घटना उसी करुणा और मानवता की भावना का प्रमाण है। संकट की घड़ी में समय पर रक्त उपलब्ध कराने के लिए पीड़ित परिवार ने पूज्य गुरुदेव संत रामपाल जी महाराज जी और दोनों रक्तदाता भाइयों का दिल से आभार व्यक्त किया है। #HumanityFirst #BloodDonation #SantRampalJiMaharaj #SANewsChhattisgarh