
NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों से जुड़े विवाद को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। अब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी इस विरोध का समर्थन करते हुए वकीलों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है और BCI चेयरमैन के इस्तीफे की मांग उठाई है।
विवाद की शुरुआत 13 अगस्त को हुई, जब BCI ने NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के सभी ग्रेजुएट्स के एडवोकेट के तौर पर नामांकन पर अगले आदेश तक रोक लगाने का निर्देश दिया था। यह कार्रवाई उन छात्रों से जुड़े विवाद के बीच हुई थी, जिन्होंने कथित तौर पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किए जाने का विरोध किया था।
BCI ने NALSAR से इस पूरे मामले पर रिपोर्ट भी मांगी थी और कथित अभियान से जुड़े लोगों की पहचान करने को कहा था। इस आदेश के सामने आने के बाद कानूनी समुदाय और छात्रों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई।
विरोध बढ़ने के बाद BCI ने कुछ ही घंटों में अपना फैसला वापस ले लिया। बाद में BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि उपलब्ध जानकारी और मिली प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के बाद 2026 बैच के छात्रों के खिलाफ कार्यवाही पूरी तरह बंद कर दी गई है।
मिश्रा ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लॉ छात्रों को संदेश देते हुए यह भी कहा कि अगर विवाद से जुड़ी उनकी किसी बात या पत्र से छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका ईमानदारी से खेद है और वह माफी मांगते हैं।
इसके बावजूद विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। इसी मामले को लेकर ऑल इंडिया यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन ने BCI चेयरमैन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। प्रदर्शन में जवाबदेही और उनके इस्तीफे की मांग उठाई जा रही है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस विरोध को समर्थन दिया। उन्होंने लिखा, ‘मनन, बस हो गया भाई! सभी लीगल कॉकरोच को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होना चाहिए।’
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने भी विरोध का समर्थन करते हुए कहा कि ‘लीगल कॉकरोच’ एकजुट होकर BCI चेयरमैन के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे और उनके इस्तीफे की मांग करेंगे। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध और जवाबदेही की मांग को लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बताया।
CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और जवाब मांगना केवल अधिकार ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है।
विवाद अब केवल NALSAR छात्रों के नामांकन तक सीमित नहीं रहा है। BCI के शुरुआती आदेश, उसके कुछ ही घंटों में वापस लिए जाने और बाद में चेयरमैन की ओर से माफी मांगने के बावजूद कानूनी समुदाय के एक हिस्से की नाराजगी कायम है।
NALSAR के छात्र संगठनों ने भी BCI की शुरुआती कार्रवाई पर आपत्ति जताई थी और चेयरमैन से माफी की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले को लेकर सवाल उठे और चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर जोर दिया था।
अब इस पूरे विवाद का अगला केंद्र BCI चेयरमैन के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन है, जहां अभिजीत दिपके और CJP से जुड़े लोग ‘लीगल कॉकरोच’ के नाम से वकीलों को एकजुट करने और मनन कुमार मिश्रा की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
Gormi, Bhind | Aug 21, 2026