
व्यंग्य कथा : "पुल का श्रेय और जिम्मेदारी"
बक्सर जिले के चीनी मिल क्रॉसिंग पर एक रेलवे ओवरब्रिज था। जब वह बनकर तैयार हुआ था, तब पूरे जिले में मानो उत्सव का माहौल था। उद्घाटन से पहले ही श्रेय लेने वालों की लंबी कतार लग गई थी।
पूर्व सांसद बोले, "यह मेरे प्रयासों का परिणाम है।"
पूर्व विधायक ने कहा, "अगर मैंने आवाज न उठाई होती तो पुल का सपना अधूरा रह जाता।"
सामाजिक कार्यकर्ता बोले, "जनता के बीच वर्षों तक संघर्ष मैंने किया था।"
सत्तापक्ष और विपक्ष के स्थानीय नेता भी पीछे नहीं रहे। सबने अपने-अपने पोस्टर छपवाए और जनता को बताया कि पुल उनके कारण बना है।
पुल बेचारा चुपचाप खड़ा सबकी बातें सुनता रहा।
समय बीता। लोग पुल से गुजरते रहे। वाहनों की आवाजाही बढ़ती गई। फिर एक दिन खबर आई कि पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। जिले में चर्चा शुरू हो गई।
मीडिया वाले माइक लेकर दौड़े। जनता ने पूछा, "जब पुल बना था तब तो सब श्रेय ले रहे थे, अब इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?"
यह सुनते ही अजीब दृश्य देखने को मिला।
जो नेता पहले पुल के साथ अपनी तस्वीर छपवाते थे, वे कहने लगे, "पुल तो तकनीकी विभाग ने बनाया था, हम तो केवल सुझाव देते थे।"
जो सामाजिक कार्यकर्ता पहले इसे अपनी उपलब्धि बताते थे, उन्होंने कहा, "हमारा काम केवल मांग उठाना था।"
जो लोग उद्घाटन मंच पर सबसे आगे बैठे थे, वे अब भीड़ में सबसे पीछे खड़े दिखाई दिए।
पुल ने मन ही मन सोचा, "वाह रे इंसान! जब मैं खड़ा हुआ तो सब मेरे पिता बन गए, और जब मैं घायल हुआ तो मैं अनाथ हो गया!"
उधर जिम्मेदारी नाम की एक महिला पूरे जिले में भटक रही थी। वह एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय जाती और पूछती, "मेरा कोई वारिस है क्या?"
हर जगह से जवाब मिलता, "क्षमा कीजिए, यहां केवल श्रेय रहता है, जिम्मेदारी नहीं।"
अंत में श्रेय और जिम्मेदारी दोनों की मुलाकात हुई। श्रेय चमचमाती गाड़ी में बैठा था, जबकि जिम्मेदारी पैदल चल रही थी।
जिम्मेदारी ने पूछा, "भाई, जब पुल बना था तब तुम इतने लोगों के साथ कैसे थे?"
श्रेय मुस्कुराया और बोला, "मेरा स्वभाव ही ऐसा है। सफलता मिलते ही मैं सौ लोगों के घर पहुंच जाता हूं।"
"और जब नुकसान होता है?"
"तब मैं तुरंत गायब हो जाता हूं, क्योंकि वहां तुम्हारी जरूरत पड़ती है।"
जिम्मेदारी ने लंबी सांस ली और कहा, "यही तो इस देश की सबसे मजबूत परंपरा है—श्रेय के सौ दावेदार, जिम्मेदारी का एक भी वारिस नहीं।"
पुल आज भी खड़ा है, लेकिन हर गुजरने वाले को मानो यही संदेश देता है—
"निर्माण के समय श्रेय बांटना आसान है, लेकिन संकट के समय जिम्मेदारी उठाना ही असली नेतृत्व है।"
Buxar, Buxar | Jun 5, 2026