
9 साल की अंजलि का अंगदान, तीन मरीजों को मिलेगी जिंदगी की नई उम्मीद
जोधपुर। पचपदरा की 9 वर्षीय अंजलि सड़क हादसे में जिंदगी की जंग हार गई, लेकिन जाते-जाते वह तीन लोगों के लिए जीवन की उम्मीद छोड़ गई। 19 अगस्त को स्कूल जाते समय सड़क पार करने के दौरान डंपर की चपेट में आने से अंजलि गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इसके बाद उसे जोधपुर एम्स में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 27 अगस्त को डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
बेटी की मौत के गम के बीच परिवार ने बड़ा फैसला लेते हुए उसके अंगदान की सहमति दी। अंजलि की दोनों किडनी और लीवर डोनेट किए गए। एक किडनी और लीवर को ग्रीन कॉरिडोर के जरिए जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल भेजा गया, जबकि दूसरी किडनी जोधपुर एम्स में ही जरूरतमंद मरीज को ट्रांसप्लांट की जाएगी।
अंजलि के पिता अशोक दास ने बताया कि शुरुआत में परिवार अंगदान के लिए तैयार नहीं था, लेकिन डॉक्टरों और विशेषज्ञों के समझाने के बाद उन्होंने सहमति दी। उन्होंने बताया कि अंजलि के अलावा परिवार में उसका एक छोटा भाई भी है।
एम्स जोधपुर में मार्च 2024 में मृतक अंगदान कार्यक्रम शुरू किया गया था। अंजलि का अंगदान एम्स जोधपुर का 12वां कैडैवरिक डोनेशन है। खास बात यह है कि यहां किसी बच्चे द्वारा किया गया यह तीसरा अंगदान है। अब तक एम्स जोधपुर में 37 अंग डोनेट किए जा चुके हैं।
अंजलि की असमय मौत ने परिवार को गहरा दुख दिया है, लेकिन उसके अंगदान से तीन जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद है। दुख की इस घड़ी में परिवार का यह फैसला समाज के लिए भी अंगदान की प्रेरणादायक मिसाल बन गया है।