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औरंगाबाद की बेटी सोनम कुमारी ने रचा इतिहास: दोनों पैर गंवाने के बाद BPSC पास कर बनीं रेवेन्यू ऑफिसर। 70वीं BPSC में 1812वीं रैंक लाकर पिता का सपना किया पूरा,"रुक जाना नहीं, तू कहीं हार के..." - यही मंत्र बना सोनम की ताकत। *हसपुरा, औरंगाबाद | 23 जून 2026* औरंगाबाद जिले के हसपुरा प्रखंड के डिंडिर गांव की बेटी सोनम कुमारी ने वो कर दिखाया जो लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है। 70वीं BPSC संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 1812वीं रैंक हासिल कर उन्होंने राजस्व अधिकारी / रेवेन्यू ऑफिसर के पद पर चयनित होकर अपने दिवंगत पिता का अधूरा सपना पूरा कर दिया। दोनों पैर गंवाने, पिता का साया उठने और दो बार असफल होने के बाद भी सोनम का हौसला नहीं टूटा। उनकी कहानी "संघर्ष से सफलता तक" का जीता-जागता उदाहरण है। *2016: वो काला दिन जिसने जिंदगी बदल दी* सोनम BPSC की तैयारी के लिए पटना में रहकर पढ़ाई कर रही थीं। साल 2016 में एक भयानक सड़क दुर्घटना हो गई। इस हादसे में उनके दोनों पैरों की अंगुलियां कट गईं। महीनों अस्पताल में भर्ती रहीं, कई सर्जरी हुईं। डॉक्टरों ने साफ कह दिया - "अब सामान्य जीवन जीना मुश्किल होगा"। सोनम बताती हैं - "उस वक्त लगा कि सब खत्म हो गया। 6 महीने बिस्तर पर और 2 साल तक मानसिक रूप से टूट गई थी। सपने चकनाचूर हो गए थे"। इसी दौरान 2015 में पिता स्व. अमर प्रसाद का हार्ट अटैक से निधन हो गया। पिता हमेशा कहते थे - "बेटी, तुझे बड़ा अफसर बनना है"। पिता चले गए, पैर चले गए, घर की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। मां पुष्पावती कुमारी आंगनबाड़ी सेविका की तनख्वाह पर घर चल रहा था। *हार के बाद भी मैदान नहीं छोड़ा: दो बार फेल, तीसरी बार विजय* हादसे के बाद सोनम ने 2016 में BPSC का पहला प्रयास किया था, पर तैयारी अधूरी रह गई। ठीक होने के बाद 2019 में दोबारा तैयारी शुरू की। लेकिन किस्मत ने फिर परीक्षा ली। लगातार दो बार असफलता मिली। कोचिंग अफोर्ड नहीं कर सकती थीं। गांव में कोई गाइड करने वाला नहीं था। तो सोनम ने खुद को ही अपना गुरु बना लिया: 1. *सेल्फ-स्टडी*: रोज 6-8 घंटे पढ़ाई 2. *इंटरनेट को क्लासरूम बनाया*: टॉपर्स के इंटरव्यू देखे, फ्री ऑनलाइन क्लास लीं 3. *खुद नोट्स बनाए*: जो समझ नहीं आया, उसे बार-बार पढ़ा। "जब 2019 में तैयारी शुरू की तो मुझे BPSC का सिलेबस भी ठीक से नहीं पता था। लेकिन धीरे-धीरे सब सीखा। असफलता ने मुझे और मजबूत किया" - सोनम। *"रुक जाना नहीं..." गीत और मां की ममता बनी ढाल* सोनम कहती हैं कि संघर्ष के सबसे कठिन दिनों में एक गीत ने उन्हें संभाला - *"रुक जाना नहीं, तू कहीं हार के, कांटों पर चल के मिलेंगे साये बहार के"*। "जब भी निराश होती, अकेले में यही गुनगुनाती थी। ये लाइनें मेरे लिए दवा बन गई थीं"। सबसे बड़ी ताकत बनीं *मां पुष्पावती कुमारी*। बेटी की हर हार पर हौसला बढ़ाया, हर छोटी जीत पर मिठाई खिलाई। *पढ़ाई का सफर: डिंडिर गांव से BPSC तक* *शिक्षा*: - *2008*: डिंडिर गांव के स्कूल से मैट्रिक - *2010*: हसपुरा से इंटर, डिस्टिंक्शन के साथ पास - *2014*: दाउदनगर कॉलेज से स्नातक *संघर्ष*: - 2016: पटना में तैयारी + सड़क दुर्घटना - 2016-2018: इलाज और रिकवरी - 2019-2025: बिना कोचिंग, सेल्फ-स्टडी से तैयारी - 2026: 70वीं BPSC में सफलता, रेवेन्यू ऑफिसर चयनित *सोनम का संदेश: "सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता"सफलता के बाद सोनम युवाओं, खासकर छात्राओं को संदेश दे रही हैं। 1. *समय की कद्र करो*: रील, फालतू वीडियो देखने में समय बर्बाद मत करो। प्रेरणादायक चीजें देखो, पढ़ाई करो। 2. *खुद पर भरोसा*: परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हों, हौसला मत टूटने दो। "मेरे पैर नहीं हैं, पर मेरे सपने हैं"। 3. *नियमितता जरूरी है*: रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ो, पर छोड़ो मत। 4. *दिव्यांगता बाधा नहीं*: शरीर की कमी को अपनी कमजोरी मत बनाओ। दिमाग और हौसला सलामत हो तो मंजिल मिल ही जाती है। *गांव में खुशी की लहर* सोनम के चयन की खबर मिलते ही डिंडिर गांव में जश्न का माहौल है। ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटीं। लोग कह रहे हैं - "सोनम ने साबित कर दिया कि बेटियां किसी से कम नहीं। विकलांगता शरीर की हो सकती है, इरादों की नहीं"। #SonamKumari #BPSC70 #RevenueOfficer #Aurangabad #Hasapura #Dindir #DivyangWarrior #BetiBachaoBetiPadhao #Inspiration #24NewsLive

Aurangabad, Aurangabad | Jun 23, 2026

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