
शिक्षक नियुक्ति पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, एस. अली बोले—लंबी लड़ाई के बाद मिला न्याय।
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति मामले में संस्कृत, उर्दू, अरबी और फारसी विषयों के अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द करने के आदेशों को निरस्त करते हुए उन्हें नियुक्ति देने का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य सरकार, शिक्षा विभाग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को आदेश की प्रति मिलने के चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। झारखंड छात्र संघ के अध्यक्ष एस. अली ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि लंबी लड़ाई के बाद अभ्यर्थियों को न्याय मिला है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में छात्र संघ ने सरकार और शिक्षा विभाग को लिखित रूप से इस मामले से अवगत कराया था, लेकिन उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की गई। एस. अली के अनुसार, झारखंड छात्र संघ के प्रयासों के बाद शिक्षा सचिव आराधना पटनायक ने वर्ष 2016 में जारी हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति विज्ञापन में संस्कृत, उर्दू, अरबी और फारसी विषयों के लिए स्नातकोत्तर (पीजी) की अनिवार्यता हटाकर स्नातक (यूजी) या समकक्ष डिग्री को मान्य करने का निर्देश दिया था। इसके बाद वर्ष 2017 में संशोधित विज्ञापन जारी किया गया, जिसके आधार पर अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, परीक्षा उत्तीर्ण की और दस्तावेजों का सत्यापन भी कराया। इसके बावजूद वर्ष 2023 में कुछ अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी पीजी या आचार्य की डिग्री नहीं होने के आधार पर रद्द कर दी गई। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि संशोधित विज्ञापन के तहत निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के आधार पर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी बाद में अतिरिक्त शर्त लगाकर रद्द करना उचित नहीं है। एस. अली ने कहा कि इस फैसले से अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है और यह उनकी लंबी कानूनी लड़ाई का महत्वपूर्ण परिणाम है।