
जिले में ई-विकास प्रणाली से उर्वरक वितरण, किसानों के लिए डिजिटल सुविधा
बगैर फार्मर आईडी वाले किसान भी प्राप्त कर सकते है ई-टोकन
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कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा के निर्देशानुसार जिले में किसानों को उर्वरक वितरण की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए ई-विकास प्रणाली के माध्यम से शत-प्रतिशत उर्वरक वितरण किया जा रहा है।
उपसंचालक कृषि श्री जीके पचौरिया ने इस संबंध में बताया कि ई-विकास प्रणाली के माध्यम से किसान घर बैठे डिजिटल टोकन जनरेट कर उर्वरक प्राप्त कर सकते हैं। आधार एवं मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीकरण कर किसान ई-टोकन बुक कर सकते हैं तथा उन्हें एसएमएस और मोबाइल एप के जरिए जानकारी भी प्राप्त होती है।
पोर्टल पर पंजीकृत किसान से संबंधित प्रकरणों का सत्यापन राजस्व अधिकारियों द्वारा किया जाता है, जिसके बाद किसान ई-टोकन प्राप्त कर उर्वरक ले सकते हैं। ई-टोकन की वैधता 72 घंटे निर्धारित की गई है। इस अवधि में उर्वरक प्राप्त नही करने पर ई-टोकन स्वतः ही निरस्त हो जाता है, इसके बाद नया टोकन बनाना होगा। जिन किसानों के पास ई-टोकन नही है, और फार्मर आईडी नही बनी है, वे वन अधिकार पट्टा, राजस्व पट्टा, सिकमी किसान, मृत किसान की भूमि, वृद्ध, दिव्यांग किसान, मंदिर, धार्मिक संस्था की भूमि विशेष प्रयोजन आदि में किसान संबंधित एसडीएम के सत्यापन उपरांत ई-टोकन प्राप्त कर उर्वरक का उठाव कर सकते है।
किसान स्वयं, एमपी ऑनलाइन अथवा कियोस्क सेंटर के माध्यम से भी टोकन जनरेट करा सकते हैं। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे सही समिति अथवा विक्रय केंद्र का चयन कर डिजिटल सुविधा का लाभ उठाएं।
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