
आत्महत्या के चेतावनी संकेतों की समय पर पहचान कर जीवन बचाने में स्वास्थ्यकर्मियों की अहम भूमिका-डॉ. धर्म सिंह मीणा
चिकित्सा अधिकारियों को मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, आत्महत्या रोकथाम एवं तनाव प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर दिया प्रशिक्षण
धौलपुर, 30 सितम्बर। जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की ओर से राजममता एवं मनदर्पण कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के समस्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के चिकित्सा अधिकारियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं आत्महत्या रोकथाम विषय पर ओरिएंटेशन प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. धर्म सिंह मीणा की अध्यक्षता में किया गया। प्रशिक्षण में चिकित्सा अधिकारियों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान, प्राथमिक सहयोग, संवेदनशील संवाद, उचित परामर्श तथा आवश्यकता होने पर विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया। इस दौरान
सीएमएचओ डॉ. मीणा ने कहा कि “मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर कार्यरत चिकित्सा अधिकारी समुदाय के सीधे संपर्क में रहते हैं। ऐसे में मानसिक तनाव अथवा आत्महत्या के जोखिम वाले व्यक्तियों की समय रहते पहचान कर उन्हें उचित सहायता एवं उपचार से जोड़ने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला में उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. चेतराम मीणा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति समाज में व्याप्त झिझक एवं कलंक को कम करने के लिए खुलकर संवाद और संवेदनशील व्यवहार जरूरी है। उन्होंने कहा कि राजममता एवं मनदर्पण जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों, किशोरों एवं युवाओं तक मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक संदेश पहुंचाया जा सकता है।
कार्यशाला में जिला नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम डॉ. सुमित मित्तल ने प्रशिक्षण के दौरान मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं आत्महत्या रोकथाम से संबंधित पांच महत्वपूर्ण मॉड्यूल पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने आत्महत्या के जोखिम एवं चेतावनी संकेतों की पहचान, संवेदनशील संवाद तथा समय पर सहायता एवं रेफरल के महत्व को समझाया।
उन्होंने मानसिक परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति की स्थिति को पहचानने, उसकी बात ध्यानपूर्वक सुनने और उचित सहायता से जोड़ने के लिए “देखों ,सुनो जोड़ो” की अवधारणा समझाई गई। विद्यार्थियों में परीक्षा तनाव की पहचान एवं तनाव प्रबंधन की व्यावहारिक तकनीकों पर चर्चा की गई।
प्रशिक्षण में कार्यस्थल पर तनाव, भावनात्मक दबाव एवं बर्नआउट की पहचान तथा उनके प्रभावी प्रबंधन के उपाय बताए गए। वहीं किशोर एवं युवा अवस्था में होने वाले भावनात्मक, व्यवहारिक एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बदलावों को समझने तथा समय रहते उचित सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
डॉ. सुमित मित्तल ने कहा कि आत्महत्या रोकथाम केवल मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है। चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी, शिक्षक, परिवार, मित्र एवं समुदाय मिलकर मजबूत सहयोग तंत्र तैयार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति में दिखाई देने वाले चेतावनी संकेतों को समय रहते पहचानना, बिना किसी निर्णय या आलोचना के उसकी बात सुनना और उसे उचित सहायता से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
प्रशिक्षण के दौरान चिकित्सा अधिकारियों से अपने-अपने स्वास्थ्य संस्थानों एवं कार्यक्षेत्र में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, आत्महत्या रोकथाम, किशोर मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन से संबंधित संदेशों को व्यापक स्तर पर समुदाय तक पहुंचाने का आह्वान किया गया।इस संस्करण में सरकारी समाचार की शैली के अनुसार शीर्षक, उपशीर्षक, अधिकारियों के कथन और मुख्य संदेशों को अधिक स्पष्ट एवं प्रभावशाली बनाया गया है।