Public App Logo
Jansamasya
News
Maharashtra
Bjp
National
Police
Bihar
India
कांग्रेस
मौत
Congress
Modi
Delhi
Viral
Rajasthan
मध्यप्रदेश
Bollywood
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
Mp
Madhyapradesh
Pmmodi
Rahulgandhi
Uttarpradesh
Haryana
Uttarakhand
Crimenews
Karnataka
Aap

#फौजी और शिक्षक ने जमकर ली नशेड़ियों की क्लास, #सिखाया ऐसा सबक कि जिंदगी भर रखेंगे याद #चंबा। #एक पूर्व सैनिक और #दूसरा सेवानिवृत शिक्षक जब श्याम की सैर पर निकले तो कुछ नशेड़ियों से मुकाबला हो गया, बस फिर क्या था? दोनों ने ली नशेड़ियों की जमकर क्लास और लगाए दो-चार..... #ज्यादा मत सोचिए। मैं बात कर रहा हूं पूर्व सैनिक #इंद्र सिंह नेगी और सेवानिवृत्ति प्रधानाचार्य व कवि #सोमवारी लाल सकलानी निशांत की। कुछ दिन पूर्व जब वे हमेशा की तरह शाम के समय चंबा से नागणी की ओर सड़क पर पैदल चल रहे थे, तो उनका सामना कुछ नशेड़ियों से हो गया। जो नशे में धुत सिगरेट के छल्ले उड़ाते हुए न जाने क्या-क्या बक रहे थे। रास्ते से और लोग भी गुजर रहे थे, लेकिन उन्हें कोई कुछ नहीं बोल रहा था। उनकी अजीबोगरीब हरकतों को देखकर इन दोनों सज्जनों को गुस्सा आ गया, कि इस तरह के अनजान व्यक्ति बाहर से आकर यहां का माहौल खराब कर रहे हैं, और अपने साथ नशे को यहां पहुंचा रहे हैं। बस फिर क्या था दोनों ने उनकी जमकर क्लास ली और दो-चार....। पांवों में गिड़गिड़ाते हुए माफी मांगने पर ही उन्हें छोड़ा फिर जाने दिया। #उनकी जगह और लोग होते तो उनकी अनदेखी कर आगे बढ़ जाते। यह दोनों सज्जन किसी परिचय के मोहताज नहीं है। दोनों सेवानिवृत्त हैं। दोनों उम्र के अंतिम पड़ावों की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन इनकी कर्मठता और जोश देखकर आज के नौजवान भी इनके आगे फीके नजर आते हैं। इस तरह की घटना इनके साथ पहले भी घट चुकी है, जब इसी रोड पर बाहर से आकर कुछ अनजान लड़कों ने इनको लूटने की असफल कोशिश की। तब भी इन दोनों ने उनको खूब सबक सिखाया और यहां से दूर खदेड़ दिया। ऐसे लोगों की ही समाज को जरूरत है।

MORE NEWS

हरेला पर्व पर हरियाली का संकल्प, घनसाली और बालगंगा रेंज में 4,580 पौधों का रोपण
#harela
#ghansali #ghansali_tehri_garhwal

हरेला पर्व पर हरियाली का संकल्प, घनसाली और बालगंगा रेंज में 4,580 पौधों का रोपण #harela #ghansali #ghansali_tehri_garhwal

Jakhnidhar, Tehri Garhwal | Jul 17, 2026

​कोटद्वार: हरेला पर्व पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी ने किया वृक्षारोपण, उद्यान विभाग के ग्राफ्टिंग कार्यों को सराहा

​कोटद्वार: हरेला पर्व पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी ने किया वृक्षारोपण, उद्यान विभाग के ग्राफ्टिंग कार्यों को सराहा

Jakhnidhar, Tehri Garhwal | Jul 16, 2026

हरेला पर हरियाली के गीत गाए जा रहे हैं...
और 7 मोड़ पर जंगल की आख़िरी साँसें गिनी जा रही हैं।

आज उत्तराखंड में कई लोगों ने काला हरेला मनाया। यह किसी पर्व का विरोध नहीं, बल्कि उस विडंबना के खिलाफ़ एक प्रतीकात्मक आवाज़ है, जहाँ एक तरफ़ पौधरोपण के उत्सव मनाए जा रहे हैं और दूसरी तरफ़ ऋषिकेश–देहरादून 7 मोड़ परियोजना के लिए सैकड़ों पेड़ काटे जा रहे हैं।
सवाल सड़क बनने का नहीं है, सवाल यह है कि क्या विकास का हर रास्ता जंगलों से होकर ही गुज़रेगा?

एक पौधा लगाना सराहनीय है, लेकिन एक परिपक्व पेड़ को खो देना सिर्फ़ एक तना खोना नहीं—वह पक्षियों का घर, वन्यजीवों का आश्रय, पहाड़ की ठंडी हवा और आने वाली पीढ़ियों की साँसें खो देना है।

आज काला हरेला उन कटते पेड़ों का मौन शोक है, जो बोल नहीं सकते।
और उन लोगों की आवाज़ है, जो चाहते हैं कि विकास हो—लेकिन प्रकृति की कीमत पर नहीं।

"हरेला तभी सार्थक होगा, जब पौधे लगाने के साथ-साथ खड़े पेड़ों को बचाने का संकल्प भी लिया जाएगा।"

हरेला पर हरियाली के गीत गाए जा रहे हैं... और 7 मोड़ पर जंगल की आख़िरी साँसें गिनी जा रही हैं। आज उत्तराखंड में कई लोगों ने काला हरेला मनाया। यह किसी पर्व का विरोध नहीं, बल्कि उस विडंबना के खिलाफ़ एक प्रतीकात्मक आवाज़ है, जहाँ एक तरफ़ पौधरोपण के उत्सव मनाए जा रहे हैं और दूसरी तरफ़ ऋषिकेश–देहरादून 7 मोड़ परियोजना के लिए सैकड़ों पेड़ काटे जा रहे हैं। सवाल सड़क बनने का नहीं है, सवाल यह है कि क्या विकास का हर रास्ता जंगलों से होकर ही गुज़रेगा? एक पौधा लगाना सराहनीय है, लेकिन एक परिपक्व पेड़ को खो देना सिर्फ़ एक तना खोना नहीं—वह पक्षियों का घर, वन्यजीवों का आश्रय, पहाड़ की ठंडी हवा और आने वाली पीढ़ियों की साँसें खो देना है। आज काला हरेला उन कटते पेड़ों का मौन शोक है, जो बोल नहीं सकते। और उन लोगों की आवाज़ है, जो चाहते हैं कि विकास हो—लेकिन प्रकृति की कीमत पर नहीं। "हरेला तभी सार्थक होगा, जब पौधे लगाने के साथ-साथ खड़े पेड़ों को बचाने का संकल्प भी लिया जाएगा।"

Jakhnidhar, Tehri Garhwal | Jul 16, 2026

विकास के दावों के बीच मौत को मात देकर स्कूल जाते बच्चे…

उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर स्थित आपदाग्रस्त चुकुम गांव से सामने आया यह दृश्य सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। मानसून में उफनती कोसी नदी को कमर तक गहरे और तेज बहाव वाले पानी के बीच पार करते मासूम बच्चे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।

बताया जा रहा है कि चुकुम गांव के करीब 120 परिवार पिछले 33 वर्षों से सुरक्षित स्थान पर विस्थापन या नदी पर एक स्थायी पुल की मांग कर रहे हैं। हर बारिश के मौसम में बच्चों की पढ़ाई और उनकी जिंदगी दोनों दांव पर लग जाती हैं।

एक तरफ करोड़ों रुपये के विकास के दावे किए जाते हैं, हर साल नई योजनाओं और उपलब्धियों का प्रचार होता है, तो दूसरी तरफ आज भी पहाड़ के बच्चे स्कूल जाने के लिए उफनती नदी पार करने को मजबूर हैं। सवाल सिर्फ एक पुल का नहीं, उन प्राथमिकताओं का है जहाँ विज्ञापनों में विकास दिखाई देता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में बच्चे अपनी जान हथेली पर रखकर शिक्षा हासिल कर रहे हैं।

क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार किया जा रहा है?

विकास के दावों के बीच मौत को मात देकर स्कूल जाते बच्चे… उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर स्थित आपदाग्रस्त चुकुम गांव से सामने आया यह दृश्य सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। मानसून में उफनती कोसी नदी को कमर तक गहरे और तेज बहाव वाले पानी के बीच पार करते मासूम बच्चे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि चुकुम गांव के करीब 120 परिवार पिछले 33 वर्षों से सुरक्षित स्थान पर विस्थापन या नदी पर एक स्थायी पुल की मांग कर रहे हैं। हर बारिश के मौसम में बच्चों की पढ़ाई और उनकी जिंदगी दोनों दांव पर लग जाती हैं। एक तरफ करोड़ों रुपये के विकास के दावे किए जाते हैं, हर साल नई योजनाओं और उपलब्धियों का प्रचार होता है, तो दूसरी तरफ आज भी पहाड़ के बच्चे स्कूल जाने के लिए उफनती नदी पार करने को मजबूर हैं। सवाल सिर्फ एक पुल का नहीं, उन प्राथमिकताओं का है जहाँ विज्ञापनों में विकास दिखाई देता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में बच्चे अपनी जान हथेली पर रखकर शिक्षा हासिल कर रहे हैं। क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार किया जा रहा है?

Jakhnidhar, Tehri Garhwal | Jul 16, 2026

देहरादून–ऋषिकेश 7 मोड़ पर पेड़ों की कटाई के विरोध में 'काला हरेला', आंदोलन से जुड़ रहे लोग

ऋषिकेश/देहरादून। देहरादून–ऋषिकेश 7 मोड़ सड़क परियोजना के लिए हो रही पेड़ों की कटाई के विरोध में लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। हरेला पर्व के अवसर पर इस बार कई पर्यावरण प्रेमी, स्थानीय निवासी और सामाजिक संगठनों ने 'काला हरेला' मनाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एक ओर हरेला पर पौधरोपण के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वर्षों पुराने पेड़ों को काटा जा रहा है। उनका कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण को बचाते हुए विकास की मांग कर रहे हैं।

आंदोलनकारियों ने सरकार से सड़क परियोजना की समीक्षा कर ऐसे विकल्प तलाशने की अपील की है, जिनसे विकास के साथ-साथ उत्तराखंड की हरियाली भी सुरक्षित रह सके।

देहरादून–ऋषिकेश 7 मोड़ पर पेड़ों की कटाई के विरोध में 'काला हरेला', आंदोलन से जुड़ रहे लोग ऋषिकेश/देहरादून। देहरादून–ऋषिकेश 7 मोड़ सड़क परियोजना के लिए हो रही पेड़ों की कटाई के विरोध में लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। हरेला पर्व के अवसर पर इस बार कई पर्यावरण प्रेमी, स्थानीय निवासी और सामाजिक संगठनों ने 'काला हरेला' मनाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एक ओर हरेला पर पौधरोपण के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वर्षों पुराने पेड़ों को काटा जा रहा है। उनका कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण को बचाते हुए विकास की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों ने सरकार से सड़क परियोजना की समीक्षा कर ऐसे विकल्प तलाशने की अपील की है, जिनसे विकास के साथ-साथ उत्तराखंड की हरियाली भी सुरक्षित रह सके।

Jakhnidhar, Tehri Garhwal | Jul 15, 2026

#फौजी और शिक्षक ने जमकर ली नशेड़ियों की क्लास, #सिखाया ऐसा सबक कि जिंदगी भर रखेंगे याद #चंबा। #एक पूर्व सैनिक और #दूसरा सेवानिवृत शिक्षक जब श्याम की सैर पर निकले तो कुछ नशेड़ियों से मुकाबला हो गया, बस फिर क्या था? दोनों ने ली नशेड़ियों की जमकर क्लास और लगाए दो-चार..... #ज्यादा मत सोचिए। मैं बात कर रहा हूं पूर्व सैनिक #इंद्र सिंह नेगी और सेवानिवृत्ति प्रधानाचार्य व कवि #सोमवारी लाल सकलानी निशांत की। कुछ दिन पूर्व जब वे हमेशा की तरह शाम के समय चंबा से नागणी की ओर सड़क पर पैदल चल रहे थे, तो उनका सामना कुछ नशेड़ियों से हो गया। जो नशे में धुत सिगरेट के छल्ले उड़ाते हुए न जाने क्या-क्या बक रहे थे। रास्ते से और लोग भी गुजर रहे थे, लेकिन उन्हें कोई कुछ नहीं बोल रहा था। उनकी अजीबोगरीब हरकतों को देखकर इन दोनों सज्जनों को गुस्सा आ गया, कि इस तरह के अनजान व्यक्ति बाहर से आकर यहां का माहौल खराब कर रहे हैं, और अपने साथ नशे को यहां पहुंचा रहे हैं। बस फिर क्या था दोनों ने उनकी जमकर क्लास ली और दो-चार....। पांवों में गिड़गिड़ाते हुए माफी मांगने पर ही उन्हें छोड़ा फिर जाने दिया। #उनकी जगह और लोग होते तो उनकी अनदेखी कर आगे बढ़ जाते। यह दोनों सज्जन किसी परिचय के मोहताज नहीं है। दोनों सेवानिवृत्त हैं। दोनों उम्र के अंतिम पड़ावों की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन इनकी कर्मठता और जोश देखकर आज के नौजवान भी इनके आगे फीके नजर आते हैं। इस तरह की घटना इनके साथ पहले भी घट चुकी है, जब इसी रोड पर बाहर से आकर कुछ अनजान लड़कों ने इनको लूटने की असफल कोशिश की। तब भी इन दोनों ने उनको खूब सबक सिखाया और यहां से दूर खदेड़ दिया। ऐसे लोगों की ही समाज को जरूरत है। - Jakhnidhar News