विकास के दावों के बीच मौत को मात देकर स्कूल जाते बच्चे…
उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर स्थित आपदाग्रस्त चुकुम गांव से सामने आया यह दृश्य सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। मानसून में उफनती कोसी नदी को कमर तक गहरे और तेज बहाव वाले पानी के बीच पार करते मासूम बच्चे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।
बताया जा रहा है कि चुकुम गांव के करीब 120 परिवार पिछले 33 वर्षों से सुरक्षित स्थान पर विस्थापन या नदी पर एक स्थायी पुल की मांग कर रहे हैं। हर बारिश के मौसम में बच्चों की पढ़ाई और उनकी जिंदगी दोनों दांव पर लग जाती हैं।
एक तरफ करोड़ों रुपये के विकास के दावे किए जाते हैं, हर साल नई योजनाओं और उपलब्धियों का प्रचार होता है, तो दूसरी तरफ आज भी पहाड़ के बच्चे स्कूल जाने के लिए उफनती नदी पार करने को मजबूर हैं। सवाल सिर्फ एक पुल का नहीं, उन प्राथमिकताओं का है जहाँ विज्ञापनों में विकास दिखाई देता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में बच्चे अपनी जान हथेली पर रखकर शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार किया जा रहा है?