
लेटेस्ट अपडेट - 75 लाख वेतन, 35 करोड़ की संपत्तियां!
प्रधान आरक्षक फिरोज खान के मामले में लोकायुक्त की जांच का दायरा बढ़ा, 38 अचल संपत्तियां और 22 बैंक खाते जांच के घेरे में
देवास/इंदौर। पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (पीटीसी), इंदौर में पदस्थ प्रधान आरक्षक चालक फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में लोकायुक्त की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। 14 अक्टूबर को देवास और इंदौर में शुरू हुई तलाशी के बाद सामने आए विवरण में 38 अचल संपत्तियों का उल्लेख है, जिनका अनुमानित बाजार मूल्य करीब 35.46 करोड़ रुपये आंका गया है। इसके अलावा 22 बैंक खातों, पांच कारोबारी फर्मों और करीब नौ वाहनों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
लोकायुक्त की शुरुआती जानकारी के अनुसार, फिरोज खान की वेतन और अन्य स्रोतों से कुल ज्ञात आय करीब 1.93 करोड़ रुपये आंकी गई, जबकि चल-अचल संपत्तियों पर करीब 12.95 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की बात सामने आई। शुरुआती आकलन में इसे ज्ञात आय से लगभग 568 प्रतिशत अनुपातहीन बताया गया। बाद की मीडिया रिपोर्टों में संपत्ति पर व्यय का आंकड़ा 15.52 करोड़ रुपये तक पहुंचने का उल्लेख है। इन आंकड़ों का अंतिम सत्यापन जांच का हिस्सा है।
परिजनों और फर्मों के नाम पर संपत्तियों की पड़ताल
जांच में फिरोज खान के अलावा उनकी पत्नी, मां, परिचित महिला रोशनी वर्मा और विभिन्न फर्मों के नाम से जुड़ी संपत्तियों के दस्तावेज सामने आने की जानकारी है। साहिल ट्रेडिंग कंपनी, रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट, रोशनी सेल्स एंड सर्विस, महाराजा रियल एस्टेट और ब्लैक हॉरनेट के वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है। लोकायुक्त बैंक खातों से राशि निकासी पर रोक लगाने के लिए बैंकों को पत्र भेजे जाने की जानकारी दे चुकी है।
21.75 बीघा जमीन का अनुबंध भी जांच में
सांवेर तहसील के ग्राम गुरान की करीब 21.75 बीघा कृषि भूमि से जुड़े अनुबंध की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह अनुबंध रोशनी वर्मा के नाम पर कराया गया था। देवास के राजोदा क्षेत्र में जमीन के सौदों और करीब नौ वाहनों के दस्तावेजों का भी सत्यापन किया जा रहा है।
लोकायुक्त की टीमें देवास और इंदौर में तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और संपत्तियों के स्वामित्व का मिलान कर रही हैं। जांच का मुख्य सवाल यही है कि ज्ञात आय के मुकाबले संपत्तियों पर किए गए खर्च का स्रोत क्या है और संबंधित संपत्तियों का वास्तविक स्वामित्व किसका है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।