
तीन चिताएं और कई सवाल: आखिर कब रुकेगा लोहरदगा में सड़क हादसों का सिलसिला
लोहरदगा के सेरेंगहातु श्मशान घाट में शनिवार को एक साथ तीन चिताएं जल रही थीं। यह केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि जिले की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। एक ही परिवार के तीन सगे भाई-बहनों की सड़क दुर्घटना में मौत ने पूरे जिले को झकझोर दिया है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर आए दिन हो रही सड़क दुर्घटनाओं के बावजूद व्यवस्था में सुधार क्यों नहीं हो रहा है? शहर की सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही, तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी और प्रभावी निगरानी का अभाव लगातार हादसों को जन्म दे रहा है।
सिर्फ नो-एंट्री लागू कर देना या दोपहिया वाहन चालकों का हेलमेट चेक कर लेना पर्याप्त नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि भारी वाहनों की नियमित जांच हो, चालकों की वैधता और उनकी शारीरिक स्थिति की जांच की जाए, नशे में वाहन चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो तथा शहरी क्षेत्र में भारी वाहनों की गति सीमा का कड़ाई से पालन कराया जाए।
जिले में सड़क सुरक्षा सप्ताह और सड़क सुरक्षा माह के दौरान जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका असर दिखाई नहीं देता। शहर में बायपास सड़क की आवश्यकता वर्षों से महसूस की जा रही है, ताकि भारी वाहनों का दबाव कम हो और दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
आज जरूरत राजनीतिक बयानबाजी की नहीं, बल्कि ठोस पहल की है। जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और संबंधित विभागों को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिससे भविष्य में किसी परिवार को एक साथ तीन अर्थियां उठाने का दर्द न सहना पड़े।