
औरंगाबाद में PMGSY सड़क की दुर्दशा: 3.58 करोड़ की लागत से बनी सड़क 2 साल में जर्जर, 57 लाख के अनुरक्षण का बोर्ड पर दावा, जमीन पर काम शून्य।
औरंगाबाद जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेज-3 के तहत बनी एक सड़क की जर्जर हालत ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। मामला औरंगाबाद पटना मुख्य पथ से मखरा भाया महुआँव, खरांटी होते हुए महुआँव तक जाने वाली सड़क का है, जो महज दो साल में ही टूटने लगी है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार इस सड़क का निर्माण 2023 में पूरा हुआ था, लेकिन रख-रखाव के अभाव में आज जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। महुआँव के पास की गई पीसीसी ढलाई का कंक्रीट उखड़ गया है, जिससे आए दिन हादसे हो रहे हैं।
*बोर्ड पर 3.58 करोड़ का हिसाब, जमीन पर कुछ नहीं*
मौके पर लगे सरकारी सूचना बोर्ड पर योजना का पूरा ब्यौरा दर्ज है, जो इस प्रकार है -
पथ की लंबाई 7.700 किलोमीटर है, जिसमें 7.400 किलोमीटर बीटी सड़क और 0.300 किलोमीटर पीसीसी सड़क शामिल है। इसका पैकेज नंबर BR02P3R11 है। निर्माण कार्य की लागत 301.57 लाख रुपये और 5 वर्षीय सामान्य अनुरक्षण की राशि 57.28 लाख रुपये है। कुल इकरारनामा 358.85 लाख रुपये का है।
कार्य 22 जुलाई 2022 को शुरू हुआ था और 21 जुलाई 2023 को पूरा होना बताया गया है। इसके संवेदक सत्येन्द्र नगर औरंगाबाद निवासी बालदेव सिंह हैं और कार्यकारी एजेंसी कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल दाउदनगर है। यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित है।
बोर्ड पर यह भी लिखा है कि 22 जुलाई 2023 से 21 जुलाई 2028 तक पांच वर्षों तक अनुरक्षण किया जाएगा, जिसके तहत घास और झाड़ियों की कटाई, नालियों का पुनः स्थापन, सोल्डर व पॉट होल की मरम्मत, क्रॉस ड्रेनेज व रोड फर्नीचर का अनुरक्षण जैसे 8 कार्य किए जाएंगे।
*ग्रामीणों में आक्रोश*
ग्रामीणों का आरोप है कि बोर्ड पर 57 लाख रुपये से अधिक के अनुरक्षण का प्रावधान दिखाया गया है, लेकिन धरातल पर एक भी कार्य नहीं हुआ है। न तो बरसात के बाद घास की कटाई हुई, न ही नालियों की सफाई। सड़क किनारे झाड़ियां उग आई हैं और गड्ढों में पानी भरने से आवागमन मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों ने कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, दाउदनगर से मांग की है कि सड़क का स्थलीय निरीक्षण कर संबंधित संवेदक से अविलंब मरम्मत कार्य कराया जाए।