राजनीति में मतभेद और दल बदल अक्सर देखने को मिलते हैं, लेकिन किसी नेता के टिकट कटने के बाद जनता और संगठन के एक बड़े वर्ग की इतनी भावनात्मक प्रतिक्रिया कम ही देखने को मिलती है......!
बताया जा रहा है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने के बाद कई जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दिया,यदि यह घटनाक्रम इसी रूप में है,तो यह उनके लंबे समय से बने व्यक्तिगत संबंधों और संगठनात्मक प्रभाव को दर्शाता है.......!
यह किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं,बल्कि उस जनाधार और व्यक्तिगत छवि की चर्चा है जो वर्षों के व्यवहार, संवाद और कार्यशैली से बनती है......!
राजनीति में पद और टिकट समय के साथ बदलते रहते हैं,लेकिन लोगों का विश्वास और सम्मान अर्जित करना सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है.......!