
समझ गया। “कॉलोनी” पूरी तरह हटा देते हैं और मुख्य एंगल रहेगा—लोन देने के नाम पर ऑफिस खुला, 8 दिन बाद ऑफिस बंद करके लोग गायब, लाखों रुपये फंसने का आरोप।
गोजाजाली में लोन देने के नाम पर खुला ऑफिस, 8 दिन में हुआ चंपत! बिना सत्यापन किराये पर दिया मकान, लाखों की रकम फंसने का आरोप
हल्द्वानी। गोजाजाली क्षेत्र में लोन दिलाने के नाम पर कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक मकान में लोन देने के नाम पर ऑफिस खोला गया और महज 8 दिन बाद ऑफिस बंद कर संचालक कथित रूप से गायब हो गए। इस पूरे मामले में लोगों के लाखों रुपये फंसने की बात सामने आ रही है।
लोन दिलाने के नाम पर लोगों से लिया पैसा
पीड़ितों का आरोप है कि ऑफिस के जरिए लोगों को लोन दिलाने का भरोसा दिया गया और इसके नाम पर उनसे पैसे लिए गए। लोगों ने अपनी जरूरत के चलते अपनी मेहनत की कमाई जमा कराई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद ऑफिस बंद हो गया और संबंधित लोग वहां से चले गए।
सिर्फ 8 दिन चला ऑफिस, फिर सब चंपत
स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिस मकान में ऑफिस खोला गया था, वहां गतिविधियां ज्यादा दिनों तक नहीं चलीं। करीब 8 दिन बाद ऑफिस बंद मिला। जिन लोगों ने लोन के नाम पर पैसे दिए थे, उनके सामने अब अपने पैसे वापस लेने का संकट खड़ा हो गया है।
बिना पुलिस सत्यापन के किराये पर दिया गया मकान?
मामले में अब मकान मालिक की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जिस मकान में यह ऑफिस खोला गया था, उसे किराये पर देने से पहले संबंधित लोगों का पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया।
सवाल यह है कि यदि किरायेदारों का सत्यापन नहीं हुआ था तो मकान किस आधार पर किराये पर दिया गया? क्या मकान मालिक ने किरायेदारों की पहचान और उनके काम की जानकारी पुलिस को दी थी?
लाखों रुपये फंसे, पीड़ित FIR के लिए परेशान
ऑफिस बंद होने के बाद कथित रूप से पैसे देने वाले लोग अपने रुपये वापस पाने के लिए परेशान हैं। पीड़ितों का कहना है कि वे पुलिस से FIR दर्ज कर मामले की जांच और उनकी रकम वापस दिलाने की मांग कर रहे हैं।
पुलिस पर भी उठ रहे सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर है। यदि लोगों के साथ वास्तव में धोखाधड़ी हुई है और पुलिस के पास शिकायत पहुंची है तो FIR दर्ज कर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
क्या पुलिस ने ऑफिस संचालकों की पहचान, मोबाइल नंबर, बैंक खातों और अन्य दस्तावेजों की जांच की? क्या मकान मालिक से पूछताछ की गई? और यदि सत्यापन नहीं हुआ था तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
आज भी मकान पर किराये का बोर्ड
हैरानी की बात यह भी बताई जा रही है कि जिस मकान में कथित तौर पर लोन का ऑफिस खोला गया था, वहां अब भी “किराये के लिए संपर्क करें” का बोर्ड लगा हुआ है। ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कब होगी?
गरीबों की मेहनत की कमाई का सवाल
यह मामला सिर्फ एक कथित फ्रॉड का नहीं, बल्कि उन लोगों की मेहनत की कमाई का भी है जिन्होंने लोन मिलने की उम्मीद में पैसे दिए थे। अब पीड़ित पुलिस और प्रशासन से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
I7 News का सवाल:
जब ऑफिस सिर्फ 8 दिन में बंद होकर लोग गायब हो गए, तो क्या समय रहते पुलिस सत्यापन और जांच से इस कथित धोखाधड़ी को रोका जा सकता था? अब FIR कब दर्ज होगी और पीड़ितों के पैसे वापस दिलाने के लिए कार्रवाई कब होगी?
नोट: खबर में लगाए गए आरोप पीड़ितों/स्थानीय लोगों के दावों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और दोष तय होना जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही संभव है।