
'हिंदी ख़बर' के सीएमडी अतुल अग्रवाल समेत 5 हिरासत में: कथित फर्जी स्टिंग और रंगदारी का आरोप, पत्रकारों ने खोला मोर्चा,लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार, देशव्यापी विरोध: राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन
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नई दिल्ली/कुरुक्षेत्र:
'हिंदी ख़बर' के प्रधान संपादक और प्रबंध निदेशक अतुल अग्रवाल को हरियाणा की कुरुक्षेत्र पुलिस ने 10 अक्टूबर को नोएडा स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया। इस कार्रवाई में 'लिविंग इंडिया न्यूज़' के वरिष्ठ संपादक सौरभ उपाध्याय और महिला पत्रकार सुदेश नैन मोर समेत कुल 5 लोगों को पकड़ा गया है। मामले में कथित ब्लैकमेलिंग और स्टिंग ऑपरेशन के नाम पर जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जबकि मीडिया जगत में इस कार्रवाई के खिलाफ तीखा आक्रोश देखा जा रहा है।
पूरा मामला: आरोप बनाम चैनल का दावा
* पुराने वीडियो को 'लाइव स्टिंग' बनाने का आरोप: कुरुक्षेत्र पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपियों पर 16 अप्रैल को रिकॉर्ड किए गए एक पुराने निजी वीडियो को हाल ही में 'लाइव स्टिंग ऑपरेशन' के तौर पर प्रसारित करने और इसके जरिए शिकायतकर्ता को ब्लैकमेल कर धन ऐंठने का आरोप है। पुलिस इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कर रही है।
* ड्रग माफिया पर कार्रवाई का पलटवार होने का दावा: दूसरी ओर, 'हिंदी ख़बर' प्रबंधन का कहना है कि चैनल हरियाणा में सक्रिय ड्रग्स और नशा माफियाओं के खिलाफ एक विशेष पड़ताल और मुहिम चला रहा था। चैनल का दावा है कि उसी नशा माफिया के दबाव में दुर्भावनापूर्ण तरीके से यह कार्रवाई की गई है।
रिमांड और कानूनी पेच
* जमानत पर फिलहाल राहत नहीं: हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। अब तक किसी भी आरोपी को जमानत नहीं मिली है।
* प्रक्रिया पर लीगल टीम के सवाल: अतुल अग्रवाल की लीगल टीम और वकीलों ने दावा किया है कि नोएडा से उन्हें बिना वैध वारंट के उठाया गया और शुरुआती दौर में उनसे कानूनी परामर्श तक की अनुमति नहीं दी गई। इसे नियमों का सीधा उल्लंघन करार दिया गया है।
देशव्यापी विरोध: राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन
गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही उत्तर प्रदेश, हरियाणा और देश के कई हिस्सों में पत्रकार संगठन लामबंद हो गए हैं:
* 'ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन' सहित विभिन्न मीडिया संगठनों ने कासगंज, देवरिया, लखनऊ और अन्य जिलों में प्रदर्शन कर जिलाधिकारियों के जरिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को ज्ञापन सौंपे।
* पत्रकारों ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार बताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने तथा निष्पक्षता साबित होने तक पत्रकारों की तुरंत रिहाई की मांग की है।
* सोशल मीडिया पर भी मामले को लेकर विभिन्न पत्रकार और समर्थक अभियान चलाकर कुरुक्षेत्र पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।
कुरुक्षेत्र पुलिस फिलहाल जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, वीडियो फुटेज और वित्तीय लेन-देन से जुड़े साक्ष्यों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।